डीटीटीडीसी ने पीडब्ल्यूडी को कई पत्र लिखे थे। अब पीडब्ल्यूडी ब्रिज के वार्षिक रखरखाव पर करीब 1.5 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इसके लिए विभाग ने निविदा जारी कर दी है। बता दें कि सिग्नेचर ब्रिज का निर्माण दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी) ने किया था। निर्माण के बाद शुरुआती तीन वर्षों तक देखरेख की जिम्मेदारी भी डीटीटीडीसी की ही थी, जिसके लिए सरकार ने पर्याप्त फंड उपलब्ध कराया था। अब फंड समाप्त हो चुका है और जटिल संरचना के कारण ब्रिज की नियमित देखरेख में दिक्कतें आ रही थीं। अधिकारियों के मुताबिक, समय पर रखरखाव न होने पर यह ब्रिज खतरनाक भी हो सकता है।
सुरक्षा के होंगे पुख्ता इंतजाम, दो गार्ड होंगे तैनात
अधिकारियों के अनुसार, ब्रिज पर सुरक्षा गार्ड की तैनाती के साथ दोनों ओर ग्रिल लगाने की योजना है। ग्रिल न होने के कारण वर्ष 2019 से अब तक यहां से यमुना में कूदकर 26 लोग जान दे चुके हैं। दिल्ली पुलिस ने भी ग्रिल लगाने का सुझाव दिया था। फिलहाल पीडब्ल्यूडी ने चोरी की घटनाएं रोकने के लिए रात में एक सशस्त्र और दिन में दो सुरक्षा गार्ड तैनात करने का फैसला लिया है।
पंखा रोड पर फ्लाईओवर की तैयारी डीपीआर बनाने के लिए 2 करोड़ मंजूर
पश्चिमी दिल्ली में ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए लोक निर्माण विभाग ने जनकपुरी पंखा रोड पर प्रस्तावित फ्लाईओवर की तैयारी कर ली है। यह फ्लाईओवर डेसू कॉलोनी से जनकपुरी डी-ब्लॉक तक बनाया जाएगा। फीजिबिलिटी स्टडी और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) के लिए कंसल्टेंट नियुक्त करने का फैसला लिया गया है। विभाग ने इसके लिए 2 करोड़ रुपये खर्च करेगा।
पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर (फ्लाईओवर) के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए कहा गया है कि यह परियोजना क्षेत्र में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभाएगी। अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित फ्लाईओवर करीब 700 मीटर लंबा होगा, जिससे जनकपुरी क्रॉसिंग सिग्नल-फ्री बन सकेगी। कंसल्टेंट ट्रैफिक वॉल्यूम के आधार पर यह तय करेंगे कि फ्लाईओवर या अंडरपास अधिक उपयुक्त होगा। यह परियोजना तिलक नगर, हरि नगर, उत्तम नगर समेत आसपास के लाखों निवासियों को राहत देगी। जनकपुरी के विधायक और शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि निवासियों की लंबे समय से मांग थी कि यहां फ्लाईओवर या एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाए। अब फीजिबिलिटी स्टडी के बाद डीपीआर तैयार होगी, जिसके आधार पर निर्माण कार्य शुरू होगा।
सीलमपुर की सड़कों को मिलेगी जल्द नई जिंदगी
पूर्वी दिल्ली के घनी आबादी वाले पुराना सीलमपुर इलाके में टूटी सड़कों और बरसात में जलभराव की समस्या से जल्द राहत और यहां की सड़कों को नई जिंदगी मिलने वाली है। दिल्ली सरकार ने सड़क और ड्रेन सुधार के लिए करीब 8 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट से हजारों स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की परेशानी कम होने की उम्मीद है। डीएसआईआईडीसी 12 जनवरी को इन दोनों प्रोजेक्ट्स के लिए टेंडर खोलेगा। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत काम शुरू किया जाएगा।
पुराना सीलमपुर में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए दिल्ली सरकार ने गांव विकास बोर्ड के तहत ये प्रोजेक्ट शुरू किया है। दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (डीएसआईआईडीसी) ने इस इलाके में सड़क और ड्रेनेज सुधार के लिए 7,97,47,285 रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। यह इलाका लंबे समय से खराब सड़कों, जाम और बारिश के समय जलभराव की समस्या झेल रहा है। नए प्रोजेक्ट के तहत सड़क नेटवर्क को बेहतर किया जाएगा और स्टॉर्म वाटर ड्रेनों के जरिये पानी की निकासी सुधारी जाएगी।
छह माह में पूरे होंगे दोनों प्रोजेक्ट
पहला प्रोजेक्ट गांधी नगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पुरानी सीलमपुर गांव के पार्ट-2 के लिए है। इस हिस्से में सड़क निर्माण के साथ-साथ आरसीसी ड्रेन और स्टॉर्म वाटर ड्रेनों का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 4,37,05,949 रुपये रखी गई है। काम को छह महीने के भीतर पूरा करना अनिवार्य किया गया है। दूसरा प्रोजेक्ट पुरानी सीलमपुर गांव के पार्ट-1 से जुड़ा है। यहां सड़कों और स्टॉर्म वाटर ड्रेनों के निर्माण का काम किया जाएगा। इस परियोजना की लागत 3,60,41,336 रुपये तय की गई है।