साईं उपवन की जमीन पर नाले का मलबा डालने पर एनजीटी ने नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई। नगर निगम की ओर से पक्ष रखने पहुंचे उप नगर आयुक्त को एनजीटी ने वापस भेज दिया और बोला कि शपथ पत्र के साथ कोर्ट आएं। हालांकि बाद में निगम अफसरों का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने अब सोमवार तक शपथ पत्र दाखिल करने की मोहलत दे दी है।
सामाजिक संस्था ‘सोसायटी फॉर प्रोटेक्शन ऑफ इंवायरमेंट एंड बायोडायवर्सिटी’ और सामाजिक कार्यकर्ता सुशील राघव की ओर से ग्रीन बेल्ट से अतिक्रमण हटाकर उन्हें बचाने के लिए एनजीटी में जनहित याचिका दाखिल की गई थी।
इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी पूर्व में राजनगर में निर्माणाधीन सिटी क्लब के निर्माण पर रोक लगा चुका है। याचिकाकर्ता ने साईं उपवन में सीवर और नाले का गंदा पानी भरने और नाले का मलबा-कूड़ा उपवन में डालने पर नगर निगम को भी इसमें पार्टी बनाया था।
एनजीटी ने इससे पहली सुनवाई पर नगर आयुक्त को समन जारी किए थे। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान नगर आयुक्त ट्रिब्युनल के समक्ष पेश न हुए और निगम की ओर से शपथ पत्र न दिया गया तो एनजीटी ने कड़ी फटकार लगाई।
निगम की ओर से उप नगर आयुक्त एसके तिवारी पेश हुए थे। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राहुल चौधरी ने बताया कि निगम की ओर से शपथ पत्र दाखिल न किया गया तो कोर्ट ने उप नगर आयुक्त को वापस जाने और शपथ पत्र लाने के मौखिक निर्देश दिए।
बाद में उप नगर आयुक्त ने फोटो पेश कर ट्रिब्युनल को बताया कि मलबा साफ कराने का काम शुरू कर दिया गया है।
ट्रिब्युनल ने अब सोमवार को शपथ पत्र दाखिल करने के आदेश दिए हैं। निगम को बताना होगा कि मलबा क्यों डाला गया गया है और इसे साफ कर साईं उपवन को दोबारा हरा-भरा बनाने के लिए नगर निगम के पास क्या एक्शन प्लान है।