अभी कुछ ही दिन की तो बात है। बेटा घर आया था। उसे वापस लद्दाख पर सीमा की रखवाली के लिए जाना था। उसको वहां के लिए रवाना किया और खुद दिल्ली के लिए निकल पड़े। घर-परिवार का हाल पूछने पर शेर सिंह से एक ही सांस में जवाब मिल गया। फतेहगढ़ के शेर सिंह सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन को अपने स्तर पर मजबूती दे रहे हैं।
बात आगे बढ़ी तो उन्होंने बता दिया कि बेटा फौज में है। उससे तकरीबन हर दिन फोन पर बात हो जाती है। अभी आज सुबह ही वह पूछ रहा था कि घर कब जाओगे। मैंने कहा कि तू अपनी लड़ाई बीच में छोड़कर लौट सकता है क्या। उसका जवाब न में आने पर मैंने कहा, जब तुम अपनी जंग नहीं छोड़ सकते तो मैं कैसे छोड़ दूं। चिंता मत कर, जंग जीतकर ही वापस लौटूंगा। हालांकि, बातचीत से लगा कि खुद से ज्यादा अपने बेटे की चिंता है। हंसते हुए उनका कहना था कि उसको चिंता इसकी है कि मुझे ठंड लग जाएगी और मुझे उसकी कि लद्दाख की बर्फीली चोटियों में वह कैसे रहता होगा।
शेर सिंह के बगल में ही जोरा सिंह भी खड़े थे। परिचय होने पर जोरा सिंह ने बताया कि उनका बेटा पंजाब पुलिस में है। उन्होंने कहा कि बेटा अपनी ड्यूटी कर रहा है और मैं अपनी। दोनों अपनी-अपनी जंग लड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पंजाब तो जवानों व किसानों का ही राज्य है। जोरा सिंह बताते हैँ कि समस्या आंदोलन के लंबे खिंचने की नहीं है, तकलीफ इससे होती है कि जब कोई किसानों को देश विरोधी या आतंकी कहता है। हम किसान है हमारा बेटा देश की सेवा कर रहा है। शेर सिंह ने दावा किया कि यहां बहुत से किसान ऐसे हैं, जिनके बच्चे वर्दी पहनकर देश की सेवा कर रहे हैं।