प्रदर्शनकारियों के अनुसार, यह विधेयक उनके अधिकारों की रक्षा करने के बजाय उन्हें सीमित करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित बदलाव ट्रांसजेंडर समुदाय के मौलिक अधिकारों के खिलाफ हैं। प्रदर्शन में शामिल रोजी ने बताया कि ट्रांसजेंडर समाज पहले से ही सामाजिक और शैक्षणिक रूप से हाशिए पर हैं। ऐसे में यह विधेयक उन्हें सुरक्षा देने के बजाय भय का माहौल पैदा कर रहा है, इसलिए सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए।
वहीं, प्रदर्शनकारी प्रिया ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए बताया कि नई परिभाषा तय करने के नाम पर उनके अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि इस विधेयक का सबसे अधिक नकारात्मक असर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले ट्रांसजेंडर लोगों पर पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सभी कानूनों में ट्रांसजेंडर समुदाय को स्पष्ट रूप से मान्यता दी जाए और उनकी पहचान, गरिमा और मौलिक अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।