नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में रविवार को जंतर-मंतर पर लेखकों और कलाकारों का सम्मेलन ‘हम देखेंगे’ का आयोजन किया गया।
सम्मेलन में पहुंचीं जानीमानी लेखिका अरुंधति रॉय ने दिल्ली में हुई हिंसा पर बोलते हुए कहा कि इस घटना को दंगा कहना गलत होगा। इस तरह की घटनाएं तो देश में पिछले छह साल से हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भड़काऊ भाषण देने वालों को पुलिस का संरक्षण मिल रहा है।
सम्मेलन में अली अहमद फातमी, अशोक वाजपेयी, भंवर मेघवंशी, डी. रघुनंदन, दक्षिणध्वनि, गौहर रजा, गीता हरिहरन, हीरा लाल राजस्थानी, जगदीश पंकज, के. सच्चिदानंद, लाल रत्नाकर, एल मंगेश डबराल, मृत्युंजय, एमपी सिंह, नंदिता नारायण, नताशा बधवार, संजय काक, संजय राजौरा, शशिभूषण समद, शुभा, सुभाष गताड़े, निष्णु नागर और हिमांशु कुमार शामिल थे।
हिमांशु कुमार ने कहा कि पहली बार मुस्लिम समुदाय की महिलाएं पर्दे की दीवार को पार कर प्रदर्शन किया। इन की आवाज को शांत कराने के लिए दिल्ली में हिंसा की गई है। इस दौरान नंदिता नारायण ने लाजिम है कि हम देखेंगे गीत गाकर सुनाया।