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औद्योगिक इकाइयों पर बढ़ेगा प्रॉपर्टी टैक्स का बोझ

Wed, 09 Jan 2019 06:25 AM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सीलिंग की मार झेल रहे उद्यमियों के बाद अब खाली, बंद या किराये पर दी गईं औद्योगिक इकाइयों के मालिकों पर जल्द प्रॉपर्टी टैक्स का बोझ बढ़ाने की दक्षिणी निगम ने तैयारी की है। किराये पर दी जाने वाली प्रॉपर्टी के लिए दोगुना, जबकि खाली या बंद पड़े इंडस्ट्रियल प्लॉट के लिए चार गुना तक बढ़ोतरी की तैयारी है। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की बैठक में सब कमेटी की ओर से सौंपी गई तृतीय निगम मूल्यांकन समिति (एमवीसी) की रिपोर्ट के आधार पर की गई सिफारिशें मंजूर किए जाने के बाद इसे एक अप्रैल से लागू कर दिया जाएगा।

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समिति ने यूज फैक्टर में संशोधन किए हैं, जिसे एक अप्रैल से लागू कर दिया जाएगा। यूज फैक्टर, ऑक्यूपेंसी, श्रेणी के मुताबिक तय मानकों में बदलाव से प्रॉपर्टी टैक्स में बढ़ोतरी की जा रही है। इसके लिए गठित सब कमेटी के सदस्य भूपिन्दर गुप्ता, कर्नल बलराम ओबरॉय ने बताया कि इन प्रस्ताव से संबंधित सभी पहलुओं पर चर्चा के बाद प्रस्ताव को पारित कर दिया गया है। औद्योगिक इकाइयों, फीस के आधार पर कुछ शैक्षिक संस्थानों, बैंक्वेट हॉल, बारात घर, क्लबों और थियेटरों के लिए भी प्रॉपर्टी टैक्स में बढ़ोतरी की गई है।

मायापुरी औद्योगिक क्षेत्र में ऐसी दर्जनों फैक्ट्रियां हैं, जिनपर संपत्ति कर में बढ़ोतरी का बोझ पड़ेगा। कई फैक्ट्री मालिकों के विदेश में होने की वजह से फैक्ट्रियां या बंद हैं या किराये पर दे दी गई हैं। समिति सदस्यों ने बताया कि इससे निगम को राजस्व का नुकसान हो रहा था, जबकि फैक्ट्रियों के बंद रहने की वजह से हजारों युवाओं से रोजगार के अवसर भी छिन गए हैं। नई सिफारिशें लागू होने से या तो फैक्ट्रियों का दोबारा संचालन शुरू कर दिया जाएगा या उन्हें बेच दिया जाएगा। इससे औद्योगिक विकास में बढ़ोतरी के साथ साथ दक्षिणी निगम के राजस्व में भी 70-80 करोड़ तक के इजाफे की उम्मीद है।  

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बैंक्वेंट हॉल और क्लबों पर भी बढ़ेेगा कर
श्रेणी डी के तहत औद्योगिक इकाई को अगर 100 वर्ग गज के 25600 रुपये संपत्ति कर के मद में चुकाना पड़ रहा है, तो एक अप्रैल से किराये पर दी गई इकाइयों के लिए यह 51200 रुपये होगी। खाली या बंद प्रॉपर्टी के लिए टैक्स की रकम एक लाख दो हजार चार सौ रुपये होगी। बैंक्वेट हॉल के लिए यूज फैक्टर को चार से बढ़ाकर छह कर दिया गया है, जबकि मनोरंजन केंद्रों और क्लबों के लिए भी फैक्टर को तीन से बढ़ाकर चार कर दिया गया है।  

खाली प्लॉटों पर भी बढ़ेगा बोझ
खाली प्लॉट के लिए मौजूदा मल्टीप्लायर फैक्टर को 0.3 से बढ़ाकर 0.5 किए जाने का प्रस्ताव है। अगर प्लॉटों पर निर्माण नहीं किया गया है तो उन्हें टैक्स के मद में अधिक अदायगी करनी पड़ेगी। निगम क्षेत्र में जमीन पर निर्माण न होने की वजह से विकास की रफ्तार भी धीमी हुई है, जबकि राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।   
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