कालकाजी की घटना, भाई को बचाने पहुंचे छोटे भाई के साथ भी मारपीट, अस्पताल से छुट्टी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कालकाजी के एल-8 इलाके में शनिवार देर रात नगर निगम की ओर से आए नोटिस को लेकर हुई खूनी झड़प में प्रॉपर्टी डीलर की मौत हो गई। आरोप है कि इमारत में रहने वाले लोगों ने प्रॉपर्टी डीलर मंजीत सिंह उर्फ बंटी (48) पर लात-घूंसों और डंडों से हमला किया। वह बेहोश होकर मौके पर ही गिर पड़े। गंभीर हालत में उन्हें एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बीच-बचाव करने पहुंचे उनके छोटे भाई दिलबाग सिंह के साथ भी मारपीट की गई। इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। कालकाजी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस उपायुक्त विनित कुमार ने बताया कि 6/191, डीडीए फ्लैट, कालकाजी इलाके में रहने वाले मंजीत सिंह उर्फ बंटी के परिवार में पत्नी और दो बच्चों के अलावा मां, भाई, बहन शामिल हैं। इस इमारत में सीआर पार्क वार्ड से निगम पार्षद आशू ठाकुर रहती हैं। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि 19 सितंबर की रात करीब 12:03 बजे एल-8, कालकाजी में झगड़े की पीसीआर कॉल मिली थी। सूचना मिलते ही कालकाजी थानाध्यक्ष अजय कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंची। जांच में पता चला कि इमारत की भूतल व तीसरी मंजिल पर रहने वाले लोगों के बीच विवाद हुआ था।
पहले दोनों पक्षों के बीच इमारत के बाहर कहासुनी हुई और बाद में मामला हाथापाई तक पहुंच गया। इसके बाद मंजीत सिंह पर कई लोगों ने हमला कर उसकी जमकर पिटाई की। आरोपियों ने बेसुध हालत में मंजीत को इमारत के बाहर ही फेंक दिया। मंजीत के भाई दिलबाग सिंह ने बताया कि उन्हें एक जानकार ने फोन कर बताया कि मंजीत का झगड़ा हो गया है और कुछ लोगों उसे पीट रहे हैं। इसके बाद वह और उसकी बहन मंजीत को बचाने के लिए पहुंचे। दिलबाग ने बताया कि जब वह मौके पर पहुंचे तो मंजीत बेसुध हालत में सड़क पर पड़े थे। वहां एक महिला थी, जब उस महिला को रोकने की कोशिश की तो आरोपियों ने उस पर भी हमला कर दिया। दिलबाग सिंह ने बताया कि आरोपियों ने उसे सड़क पर गिरा दिया और फिर जमकर पीटा। उसकी बहन ने बीच बचाव कर उसे बचाया और दोनों भाईयों को अस्पताल पहुंचाया। जहां मंजीत को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
इसलिए हुआ था विवाद
इस इमारत में मृतक मंजीत का प्रॉपर्टी डीलर का ऑफिस है। वह कोई निर्माण करवा रहे थे। इमारत में हुए अतिक्रमण को लेकर दिल्ली नगर निगम की ओर से नोटिस आया हुआ था। आरोपियों को लगता था कि मंजीत ने इसकी शिकायत की है। इसी बात पर विवाद खूनी झड़प तक पहुंच गया।