दिल्ली में प्रॉपर्टी की मांग लगातार घटती जा रही है। दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग के रेवन्यू में आई कमी इसी ओर इशारा कर रही है।
मौजूदा वित्तीय वर्ष में अभी तक विभाग अपने लक्ष्य से कोसों दूर है। वह भी तब जबकि दिल्ली के सर्कल रेट में 200 फीसदी तक का इजाफा किया गया था।
अधिकारियों के मुताबिक राजस्व विभाग को मौजूदा वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2013-2014 की जनवरी तक) में स्टांप ड्यूटी से 200 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिला है।
इस बार पूरा हो पाएगा ये लक्ष्य?
पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि के दौरान रेवेन्यू का आंकड़ा 232 करोड़ रुपये था। विभाग की मानें तो चुनाव से पहले ही संपत्ति के खरीद फरोख्त में कमी आई थी। कमी का सिलसिला अभी तक बरकरार है।
यह हाल तब है जबकि दिल्ली में पिछली बार 4 दिसंबर 2012 को सर्कल रेट में 200 फीसदी की भारी बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद साउथ दिल्ली में सर्कल रेट साढ़े 6 लाख रुपये प्रति स्क्वायर मीटर तक पहुंच गया था।
तब प्रॉपर्टी के क्रेज को देखते हुए 300 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि मौजूदा वित्तीय वर्ष में अभी तक विभाग, तय लक्ष्य के पास नहीं पहुंचता दिख रहा है।
दिल्ली से सस्ती है एनसीआर की जमीन
अधिकारियों के मुताबिक एनसीआर में दिल्ली की तुलना में कम दाम में विकसित प्रॉपर्टी की उपलब्धता इसकी बड़ी वजह है। उनके मुताबिक लोग दिल्ली के बजाए उसके करीबी इलाकों में घर खरीदना पसंद कर रहे हैं।
वैसे,अधिकारी दिल्ली विकास प्राधिकरण के कुछ गलत नीतियों को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हैं। अहम है कि हाल ही में करीब 15 दिन तक दिल्ली में संपत्ति की खरीद-फरोख्त बंद रही थी, जिसका नुकसान विभाग को उठाना पड़ा था।
राजस्व विभाग के मंडलायुक्त धर्मपाल कहते हैं कि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस वर्ष के रेवन्यू में कमी दर्ज की गई है। इसकी स्टडी की जा रही है। संपत्ति के खरीद फरोख्त में आई कमी का कारणों को ध्यान में रखकर ही सर्कल रेट बढ़ाया जाएगा।