अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने 27 साल पुराने एक रिक्शा चालक हत्या मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि हत्या का आरोप साबित करने के लिए मकसद का सबूत आवश्यक नहीं है। कोर्ट ने दोषी मोहम्मद नवाब की अपील खारिज करते हुए उसकी दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा।
नवंबर 1998 में रिक्शा चालक ज्ञानी की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए नवाब ने अपनी सजा को चुनौती दी थी। उसने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष उसका कोई मकसद साबित करने में विफल रहा। हालांकि, न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और विमल कुमार यादव की पीठ ने इस दलील को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा, जब अपराध को साबित करने वाले तथ्य स्पष्ट हों तो मकसद का साबित न होना कोई मायने नहीं रखता। कई गंभीर अपराध छोटे और तुच्छ कारणों से किए जाते हैं। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष ने नवाब के अपराध को संदेह से परे साबित कर दिया है।