सोशल मीडिया पर छात्राओं को ब्यूटीफुल बेब्स, स्वीटू लिखने वाले नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के फिजियोथैरेपी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सेंथिल पी कुमार को विश्वविद्यालय प्रशासन ने सेवा मुक्त कर दिया है। जांच के लिए बनी समिति के सामने प्रोफेसर ने बुधवार को अपना पक्ष रखा। हालांकि, कमेटी उनके जवाबों से संतुष्ट नहीं हुई।
जिसके बाद कमेटी की रिपोर्ट पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें सेवा मुक्त कर दिया है। सेंथिल पी कुमार के खिलाफ 14 लड़कियों ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ऑफ फिजियोथैरेपी की वुमन सेल में उत्पीड़न और शोषण की शिकायत दर्ज कराई थी। एसोसिएशन की मानविकी सेल कि रुचि बासनी ने एनआईयू को मेल से शिकायत दी थी। जांच के लिए विश्वविद्यालय ने छह मई को प्रोफेसरों की एक कमेटी बनाई थी। जिसे 10 मई तक रिपोर्ट देनी थी।
जांच कमेटी अध्यक्ष, विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर जयानंद ने बुधवार को डॉ. सेंथिल को बयान दर्ज कराने बुलाया था। कमेटी ने लड़कियों को आपत्तिजनक संदेश भेजने को अक्षम्य माना। कमेटी ने कहा कि विवि प्रशासन महिलाओं के सम्मान के लिए हमेशा आगे रहता है। प्रोफेसर पर लड़कियों द्वारा लगाए गए आरोप अक्षम्यता की श्रेणी में आते हैं। एनआईयू के कुलसचिव प्रोफेसर जयानंद ने कहा कि डॉ. सेंथिल के पक्ष से जांच कमेटी संतुष्ट नहीं हुई। इसके चलते उन्हें विश्वविद्यालय से निकाल दिया गया। साथ ही विवि परिसर में उनके घुसने पर रोक लगा दी गई है।
वहीं जांच कमेटी का दावा है कि प्रोफेसर पर लगे आरोप विवि परिसर के बाहर के हैं। साथ ही विवि में प्रोफेसर सेंथिल की नियुक्ति से पहले के यह आरोप हैं। हालांकि, जांच कमेटी ने कहा कि मामले में महिलाओं के सम्मान को सर्वोच्च रखा गया है।