प्रो. नजमा अख्तर जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नई व पहली महिला कुलपति
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प्रो. नजमा अख्तर जामिया मिल्लिया इस्लामिया की नई व पहली महिला कुलपति बन गई हैं। वहीं, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा मोतीहारी विश्वविद्यालय बिहार और आईसीएचआर के मेंबर सेक्रेटरी व बीएचयू के प्रो. रजनीश शुक्ला महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति बनाए गए हैं। केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विजिटर और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बृहस्पतिवार शाम एक साल से खाली पड़े कुलपति के पदों के लिए दूसरे पैनल में भेजें नामों में से चयन कर मंजूरी दे दी है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के साथ ही संबंधित विश्वविद्यालयों को नए कुलपति की नियुक्ति की जानकारी भेज दी गई है। पिछले एक साल से तीनों विश्वविद्यालयों में कुलपति का पद खाली पड़ा था। तीनों केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अगले पांच सालों के लिए कुलपति पद की जिम्मेदारी दी गई है।
जामिया के इतिहास में सर्वोच्च पदों पर दोनों महिलाएं
देशभर में और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सौ साल के इतिहास में पहली बार विश्वविद्यालय की सर्वोच्च कमान दो महिलाओं के हाथ में होगी। मोदी सरकार ने 2018 में मणिपुर की राज्यपाल व पूर्व केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री डॉ. नजमा हेपतुल्ला को कुलाधिपति (चांसलर) नियुक्ति किया था। अब 2019 में केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विजिटर ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन (न्यूपा) की प्रमुख डॉ. नजमा अख्तर को कुलपति की जिम्मेदारी सौंपी है। फिलहाल देशभर में किसी भी विश्वविद्यालय के दोनों सर्वोच्च पदों पर महिलाएं नहीं हैं। प्रो. नजमा अलीगढ़ मुस्लिम विवि, कुरुक्षेत्र विवि से पासआउट हैं। इन्होंने दो किताब भी लिखी हैं।
आईसीएचआर के मेंबर सेक्रेटरी बनें वर्धा विवि के कुलपति
आईसीएचआर (इंडियन काउंसिल फॉर हिस्टोरिकल रिसर्च) के मेंबर सेक्रेटरी डॉ. रजनीश कुमार शुक्ला महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति बनाए गए हैं। वह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व प्रसिद्ध शिक्षाविद भी हैं। प्रो. शुक्ला ने आईसीएचआर के मेंबर सेक्रेटरी पद पर तैनात होने के दौरान भारतीय इतिहास में शोध कार्यों के लिए नए आयाम व योजनाएं बनाई, ताकि हिंदू इतिहास से जुड़ी सही जानकारियों से युवा पीढ़ी रूबरू हो सकें।