लक्ष्मी नगर, मयूर विहार, पटपड़गंज, विनोद नगर, शाहदरा, गांधीनगर मार्केट, शास्त्री पार्क, सीलमपुर, जाफराबाद, बाबरपुर, गोकुलपुरी और ताहिरपुर गांव समेत अन्य इलाकों में जगह-जगह कूड़े का अंबार लगा हुआ है। इन इलाकों में कई दिनों से कूड़ा नहीं उठाया गया है।
पूर्वी दिल्ली में कूड़े की समस्या दिन-ब-दिन विकराल रूप लेती जा रही है। जिले में कूड़े का ढेर बढ़ता ही जा रहा है। जगह-जगह कूड़े का ढेर गालियों व मुख्य सड़कों पर पड़ा हुआ है। इन दिनों सरकार ने प्रदेश भर में स्वच्छता अभियान चलाया हुआ है। इसके बावजूद यह हाल देखने को मिल रहा है।
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लक्ष्मी नगर, मयूर विहार, पटपड़गंज, विनोद नगर, शाहदरा, गांधीनगर मार्केट, शास्त्री पार्क, सीलमपुर, जाफराबाद, बाबरपुर, गोकुलपुरी और ताहिरपुर गांव समेत अन्य इलाकों में जगह-जगह कूड़े का अंबार लगा हुआ है। इन इलाकों में कई दिनों से कूड़ा नहीं उठाया गया है। लोगों का कहना है कि चुनाव से पहले नेता गलियों को साफ-सुथरा करने का वादा करके चले जाते हैं, लेकिन चुनाव जीत जाने के बाद वह लौट कर कभी इन गलियों की ओर नहीं देखते हैं। वह खुद भी इन्हीं सड़कों से होकर गुजरते तो जरूर हैं, मगर उनका ध्यान कूड़े के ढेर पर नहीं जाता है। यह ढेर ऐसे ही कई दिनों तक पड़ा रहता है। कर्मचारी इसे साफ करने की थोड़ी सी भी जहमत नहीं उठाते हैं। यह कूड़ा यूं ही सड़ता रहता है, जिसकी वजह से इसमें से दुर्गंध आने लगती है। इसके पास से होकर गुजरने पर दम घुटने लगता है। स्थिति ऐसी हो गई है कि लोगों को नाक पर हाथ रखकर चलना पड़ रहा है।
खुद को भी बदलना बेहद जरूरी
दिल्ली को स्वच्छ बनाने के लिए लोगों को भी बदलना होगा। लोग अपने घर की सफाई तो करते हैं, लेकिन अपने आसपास की सफाई नहीं करते हैं। दिल्ली को साफ-सुथरा बनाने के लिए लोगों को पहले अपनी खुद की भी मानसिकता बदलनी पड़ेगी। साफ-सफाई करते समय अपने आसपास की भी सफाई करनी होगी। वहीं, कूड़े को इधर-उधर फेंकने की जगह उसे कूड़ेदान में फेंकने की आदत डालना चाहिए तभी यह शहर स्वच्छ बन सकेगा।
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कूड़े की वजह से होता है सीवर जाम और जलभराव, घरों में घुस जाता है पानी
लोगों ने बताया कि बरसात के दौरान यह कूड़ा जलभराव होने की सबसे बड़ी वजह बनता है। कई दिनों तक सड़कों और गलियों में पड़े रहने के बाद यह बारिश के पानी के साथ बहकर नालियों में चला जाता है और सीवर को जाम कर देता है। इससे सड़क पर पानी लबालब भर जाता है। कूड़े की वजह से ही बारिश का पानी लोगों के घर और दुकान में घुसने का सबब बनता है। इससे लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है।
नाले से गाद निकालकर गलियों में छोड़े देते हैं
कई बार सफाई कर्मचारी नाले से गाद निकालकर गलियों में ही छोड़े देते हैं। यह गाद कई दिनों तक ऐसे ही सूखती रहती है। बारिश के बाद यह गाद फिर से नाले में चला जाता है। - नवल किशोर, ताहिरपुर गांव
कई दिनों तक कूड़ा गलियों में पड़ा रहता है। इस पर मक्खियां भिनभिनाती रहती हैं। इसके पास से होकर गुजरने पर दुर्गंध आती है। साफ-सफाई नहीं होने से लोगों के स्वास्थ्य खराब हो रहे हैं। - फैसल मंसूरी, गोकुलपुरी