नोटों की तंगी से वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगने लगा है। आने वाले दिनों में बाजार की अर्थव्यवस्था और बिगाड़ सकती है। मार्केट में कैश फ्लो न होने से व्यवसायिक वाहनों की रफ्तार मंद पड़ गई है। एनसीआर में 50 हजार से ज्यादा ट्रकों का चक्का जाम होने की स्थिति बन गई है। लंबी दूरी के रूट सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। ट्रांसपोर्टरों ने आने वाले दिनों में इसका असर बाजार और उद्योगों पर पड़ने की आशंका जताई है।
500 और 1000 रुपये का नोट बंद होने का बड़ा असर ट्रांसपोर्टरों पर पड़ा है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) इसको लेकर पहले ही चिंता जाहिर कर चुकी है और दूध, दवा, सब्जी, फलों के अलावा अन्य जरूरी उत्पादों पर इसके असर के संकेत दे चुकी है। 80 फीसदी ट्रांसपोर्ट संचालन नगद आधारित बताया जाता है, जिसके लिए हर रोज ट्रांसपोर्ट सेक्टर को 1194 करोड़ रुपये की जरूरत होती है।
ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े जानकारों की मानें ट्रांसपोर्ट एक्सपेंस के तौर पर लंबी दूरी के एक ट्रक को एक ट्रिप के लिए 35 हजार रुपये कैश की छूट है। ऐसे में कम से कम 10 ट्रक वाले ट्रांसपोर्टर को रोजाना 3.50 लाख रुपये की जरूरत होती है। बड़े नोट बंद होने की वजह से संचालन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में करीब एक हजार ट्रक ऑपरेटर बताए जाते हैं, जिनके 60 हजार ट्रक दिल्ली एनसीआर के अलावा पूरे देश में माल ढोते हैं। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के मुताबिक 70 फीसदी ट्रकों का चक्का जाम है। दिल्ली से सटे नोएडा में 600 ट्रांसपोर्टरों के तकरीबन 7 हजार व्यवसायिक वाहनों का संचालन प्रभावित हुआ है। इसके अलावा गुड़गांव में 1500 से ज्यादा ट्रांसपोर्टरों के 50 से 60 हजार व्यवसायिक वाहनों का संचालन ठप है। फरीदाबाद ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन का जोर अब चालकों के बैंक खाते खुलवाने पर है।
क्या-क्या समस्या हैं सामने
हालांकि, सरकार की तरफ से पुराने नोटों को पेट्रोल पंपों पर स्वीकार किए जाने की समय सीमा दूसरी बार भी बढ़ाई जा चुकी है। इसके अलावा एनएचएआई के टोल फ्री की अवधि भी बढ़ा दी गई है लेकिन नगदी की समस्या ट्रांसपोर्टरों के आड़े आ रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग तो टोल फ्री हैं लेकिन स्टेट हाईवे पर टोल को लेकर तनातनी जारी है। लंबी दूरी पर जाने वाले माल वाहनों के चालक, हेल्परों को नगदी न होने से खानपान की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। आरटीओ चेकपोस्ट और पुलिस की मनमानी का सामना करना पड़ रहा है
लंबी दूरी पर अटके ट्रक
फरीदाबाद के ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक लंबी दूरी के रूटों पर गए कई ट्रक रास्ते में ही खड़े हो गए हैं। इसके अलावा चेन्नई, बंगलूरू, पुणे की ओर जाने वाले ट्रक जो पहले छह से सात दिन में पहुंचते थे, वे अब 8 से 10 दिन में पहुंच रहे हैं। जैसे-तैसे मनी मैनेजमेंट कर ट्रांसपोर्टर काम चला रहे हैं।
देश की खातिर नुकसान झेलने को तैयार
70 फीसदी ट्रांसपोर्टर इन दिनों खाली बैठे हैं। महज 30 फीसदी वाहनों की फ्लीट मूव हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश की भलाई के लिए अच्छा कदम उठाया है। यही सोचकर हम नुकसान झेलने को भी तैयार हैं। हालांकि, महंगाई का सीधा जुड़ाव ट्रांसपोर्ट से होता है। ऐसे में आने वाले दिनों में दिक्कतें आ सकती हैं। -सुभाष कौशिक, महासचिव, ऑल फरीदाबाद ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन
अब नाममात्र की आ रही हैं बुकिंग
कैश की कमी के चलते न केवल हमें दिक्कतें आ रही है, बल्कि व्यापार और उद्योग जगत भी इसका सामना कर रहा है। यही वजह है कि सप्ताह पहले के मुकाबले बुकिंग अब नाममात्र की रह गई है। वहीं, कैश न होने के कारण ट्रक संचालित नहीं हो रहे हैं। उम्मीद है जल्द ही इस समस्या का समाधान निकलेगा। -चौधरी वेदपाल, अध्यक्ष, नोएडा ट्रांसपोर्ट संयुक्त मोर्चा
93 लाख ट्रक हैं देशभर में
50 लाख बस, टूरिस्ट टैक्सी व मैक्सी कैब की संख्या
5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का है सालाना कारोबार