जेलों में निरुद्ध विचाराधीन कैदी अब सप्ताह में दो बार ही अपने दोस्त, रिश्तेदार या फिर कानूनी सलाहकारों से मिल सकेंगे। इस मामले में लिए गए दिल्ली सरकार के निर्णय को उच्च न्यायालय ने सही ठहराया है। न्यायालय ने कहा है कि विचाराधीन कैदियों और कैदियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए जेल में कैदियों के परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, दोस्तों और कानूनी सलाहकारों द्वारा सप्ताह में दो बार मिलने की संख्या को सीमित करने के दिल्ली सरकार का फैसला सही है। इसे बदला जाना उचित नहीं है।