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Delhi: हफ्ते में दो बार ही दोस्त, रिश्तेदार व सलाहकारों से मिल सकेंगे कैदी, सरकार के फैसले को HC ने ठहराया सही

Mon, 20 Feb 2023 06:53 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि संख्या को सप्ताह में दो बार तक सीमित करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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जेलों में निरुद्ध विचाराधीन कैदी अब सप्ताह में दो बार ही अपने दोस्त, रिश्तेदार या फिर कानूनी सलाहकारों से मिल सकेंगे। इस मामले में लिए गए दिल्ली सरकार के निर्णय को उच्च न्यायालय ने सही ठहराया है। न्यायालय ने कहा है कि विचाराधीन कैदियों और कैदियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए जेल में कैदियों के परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, दोस्तों और कानूनी सलाहकारों द्वारा सप्ताह में दो बार मिलने की संख्या को सीमित करने के दिल्ली सरकार का फैसला सही है। इसे बदला जाना उचित नहीं है।

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मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि जेलों में उपलब्ध सुविधाओं, कर्मचारियों की उपलब्धता और विचाराधीन कैदियों की संख्या पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद निर्णय लिया गया है।

अदालत ने दिल्ली जेल नियम, 2018 के नियम 585 को चुनौती देने वाले दो अधिवक्ताओं द्वारा दायर एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की। नियम 585 में कहा गया है कि प्रत्येक कैदी को अपील की तैयारी करने, जमानत प्राप्त करने या अपनी संपत्ति और पारिवारिक मामलों के प्रबंधन की व्यवस्था करने के लिए अपने परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, दोस्तों और कानूनी सलाहकारों से मिलने या संवाद करने के लिए उचित सुविधाएं दी जाएंगी। 
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याचिकाकर्ताओं ने कहा कि संख्या को सप्ताह में दो बार तक सीमित करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। दूसरी ओर दिल्ली सरकार ने अपने जवाब में कहा कि मिलने वालों की संख्या को सीमित करने का निर्णय राष्ट्रीय राजधानी की जेलों में कैदियों की संख्या को देखते हुए लिया गया है।
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