अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने रविवार को एक विशेष सुनवाई में दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह पिछले सप्ताह कुछ कार्यकर्ताओं और छात्रों को हिरासत में लेने की परिस्थितियों और कानूनी अधिकार के बारे में हलफनामा दाखिल करे। कोर्ट ने पुलिस को संबंधित सीसीटीवी फुटेज संरक्षित रखने का भी आदेश दिया। इसमें एक मामला जेएनयू से संबंधित है जबकि दूसरा किसानों से जुड़ा है।
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की खंडपीठ ने हेबियस कॉर्पस याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कई छात्रों और मजदूर अधिकारों से जुड़े कार्यकर्ताओं को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के अगवा कर लिया था। इस दौरान उनकी पिटाई की गई। इनमें से करीब 10 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें कुछ छात्र भी शामिल थे। दिल्ली पुलिस के वकील ने कोर्ट को बताया कि सभी हिरासत में लिए गए व्यक्तियों को रिहा कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मामला की एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसकी कॉपी गोपनीय है। पुलिस ने कहा कि एफआईआर की प्रति आरोपियों को नहीं दी जा सकती और इसे कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा। हालांकि याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हिरासत में लिए गए लोगों में से एक व्यक्ति अभी लापता है।
कोर्ट ने पुलिस को एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें हिरासत की वजह, कानूनी प्रावधान और अन्य विवरण स्पष्ट करने होंगे। कोर्ट ने उन स्थानों के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का आदेश दिया, जहां से कथित तौर पर इन कार्यकर्ताओं को उठाया गया था। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हिरासत अवैध थी जिसमें यातना के भी आरोप है।