नियामक प्राधिकरण करेगा निगरानी
निजी विश्वविद्यालयों के लिए दिल्ली निजी विश्वविद्यालय नियामक प्राधिकरण बनाने का प्रस्ताव है। यह शिक्षण की गुणवत्ता, शोध, संस्थागत संचालन, दाखिले, परीक्षाओं, छात्र रिकॉर्ड और विश्वविद्यालय के समग्र प्रदर्शन पर नजर रखेगा। विश्वविद्यालय खोलने के प्रस्तावों की जांच के लिए वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, शिक्षाविदों, यूजीसी प्रतिनिधियों और वित्त विशेषज्ञों की समिति भी बनाई जाएगी।
जमीन की कमी के चलते बहुमंजिला परिसर
दिल्ली में जमीन की सीमित उपलब्धता को देखते हुए निजी विश्वविद्यालयों को आधुनिक बहुमंजिला शहरी परिसर बनाने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। इसके लिए पारंपरिक बड़े और जमीन आधारित परिसर की अनिवार्यता नहीं होगी।
सरकार से नियमित अनुदान नहीं
प्रस्तावित निजी विश्वविद्यालय स्ववित्तपोषित होंगे और उन्हें दिल्ली सरकार से नियमित वित्तीय अनुदान नहीं मिलेगा। हालांकि नियमों के अनुसार शोध परियोजनाओं और संबंधित वित्तीय सहायता के लिए वे पात्र होंगे। सरकार का लक्ष्य दिल्ली में उच्च शिक्षा का मजबूत तंत्र तैयार करना और छात्रों के पड़ोसी राज्यों या विदेश जाने की जरूरत कम करना है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- निजी विश्वविद्यालय नियामक प्राधिकरण बनेगा, जिसके जरिए दाखिले, परीक्षा, शिक्षण गुणवत्ता, शोध और संस्थागत कामकाज की निगरानी होगी।
- दिल्ली में जमीन की कमी के चलते बहुमंजिला परिसर की अनुमति, पारंपरिक बड़े परिसरों के बजाय नया शहरी मॉडल।
- निजी विश्वविद्यालयों को सरकार से नियमित अनुदान नहीं मिलेगा, ये संस्थान स्ववित्तपोषित होंगे।
- दिल्ली के छात्रों को मिलेंगे उच्च शिक्षा के ज्यादा विकल्प, पड़ोसी राज्यों और विदेश जाने की जरूरत कम करने का लक्ष्य।
- विश्वविद्यालय खोलने के प्रस्तावों की विशेषज्ञ समिति जांच करेगी, इसमें सरकारी अधिकारी, शिक्षाविद, यूजीसी और वित्त विशेषज्ञ शामिल होंगे।