वंदे भारत जैसी ट्रेनों के लिए भी रास्ता होगा साफ
दिल्ली से मुंबई के बीच अभी सबसे कम समय में नई दिल्ली-मुंबई राजधानी करीब 16 घंटे में पहुंचती है। ट्रैक की गति क्षमता बढ़ने से यह दूरी लगभग 12 घंटे में तय होगी। इस कॉरिडोर पर अपग्रेडेशन पूरा होने के बाद वंदे भारत जैसी सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों के संचालन का रास्ता भी साफ हो जाएगा। रेलवे ने परियोजना को ‘मिशन रफ्तार’ के तहत शामिल किया है। इसका उद्देश्य प्रमुख रेल मार्गों पर ट्रेनों की औसत गति में वृद्धि करना है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़कर अर्थव्यवस्था को फायदा
इस कॉरिडोर पर मालगाड़ियों की स्पीड बढ़ने से लॉजिस्टिक्स सेक्टर में फायदा होगा। वर्तमान में माल ढुलाई में देरी के कारण उद्योगों को नुकसान होता है। ट्रेन की रफ्तार बढ़ने से माल जल्दी पहुंचेगा, जिससे सप्लाई चेन मजबूत होगी। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के साथ मिलकर यह रूट भी भारत की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बनेगा। डीएफसी पहले से ही निर्माणाधीन है।
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर हाई-स्पीड ट्रेन का एकमात्र प्रोजेक्ट
भारत में हाई-स्पीड ट्रेन की बात करें तो मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर एकमात्र स्वीकृत प्रोजेक्ट है, जहां 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन चलाई जाएगी। दिल्ली-मुंबई अपग्रेडेशन इससे अलग है, लेकिन यह सेमी-हाई स्पीड की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सहारनपुर-बनारस के बीच चलेगी अनारक्षित स्पेशल ट्रेन
नई दिल्ली। उत्तर रेलवे की ओर से सहारनपुर जंक्शन और बनारस के बीच एक अनारक्षित विशेष ट्रेन का संचालन शुरू किया गया है। यह ट्रेन एक-एक ट्रिप के लिए संचालित की जाएगी। रेलवे के अनुसार ट्रेन संख्या 04552 सहारनपुर से बनारस के लिए चलेगी। साथ ही ट्रेन संख्या 04551 बनारस से सहारनपुर के बीच चलेगी।