दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनिल कुमार ने कहा कि भाजपा शासित दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में कार्यरत 23000 सफाई कर्मचारियों को निजी हाथों में सौंपने का प्रस्ताव पार्टी की गरीब विरोधी नीति को उजागर करता है। अगर निगम की ओर से सफाई कर्मचारियों के निजीकरण का प्रस्ताव लागू होता है तो दक्षिणी दिल्ली के लगभग 23000, उत्तरी दिल्ली के 26,000 और पूर्वी दिल्ली नगर निगम के लगभग 17000 कर्मचारियों को निजीकरण के कारण सरकारी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। सफाई कर्मचारियां के हितों की रक्षा के लिए कांग्रेस पार्टी ने सफाई कर्मचारी आयोग का गठन किया था।
संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 14 वर्षो से दिल्ली नगर निगम में शासित भाजपा के शासन में भ्रष्टाचार के कारण लगातार वित्तिय घाटा बढ़ रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि जब कांग्रेस दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम की सत्ता में थी तो तीनों निगमों की बेहतरी के लिए उन्हें राशि दी गई।
कांग्रेस सरकार द्वारा गैर नियोजित राजस्व अर्जित करने के लिए सिविक सेन्टर का निर्माण किया, जिससे वर्तमान में 80 करोड़ रुपये वार्षिक राजस्व नगर निगम को प्राप्त होता है। अनिल कुमार ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के कारण भाजपा हो या आप पार्टी, दोनों के निगम पार्षद लैंटरमेन के नाम से बदनाम हो रहे है।
बिना रिश्वत के कोई मकान नही बनने दे रहे है और नक्शे पास करवाना, टेंडर पास करवाने, लाईसेंसिंग पूरे निगम में भष्टाचार व्याप्त है। तीनों निगमों के तहत दिल्ली का 97.81 प्रतिशत क्षेत्र ओर 94.23 प्रतिशत जनसंख्या आती है। निगमों के पास प्रति एक लाख की आबादी पर महज 390 कर्मचारी है, जिनपर गाज गिरने से उनके लिए मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।