30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त को भगवान शिव के जलाभिषेक के साथ समाप्त होगी यात्रा, बाजारों में भी दिखी रौनक
संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। उत्तर भारत में सावन माह के आगमन के साथ ही कांवड़ यात्रा की तैयारियां तेज हो गई हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों में कांवड़ियों के स्वागत के लिए सड़क किनारे सेवा शिविर व पंडाल सजाए जा रहे हैं। कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त को भगवान शिव के जलाभिषेक पर खत्म होगी।
सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने यात्रा को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। कई स्थानों पर कांवड़ियों के लिए भोजन, फल व आराम करने की सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। सावन के साथ ही क्षेत्र में भक्ति, आस्था और उत्साह का वातावरण बनने लगा है। आने वाले दिनों में लाखों श्रद्धालु बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ अपनी धार्मिक यात्रा पर निकलेंगे।
बाजारों में कांवड़, भगवा वस्त्र, धार्मिक झंडे व पूजन सामग्री की खरीदारी बढ़ गई है। श्रद्धालुओं के बीच यात्रा को लेकर उत्साह है और कई समूहों ने अपनी यात्रा की रूपरेखा तैयार कर ली है।
कांवड़ यात्रा हिंदू धर्म की प्रमुख धार्मिक यात्राओं में से एक है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु हरिद्वार व गंगोत्री से गंगाजल लेकर अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों तक पहुंचते हैं। मान्यता है कि सावन में भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।