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डीजल जनरेटर से डेढ़ गुना महंगा है प्रीपेड बिजली मीटर का विकल्प

Sun, 11 Oct 2020 12:25 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी किशन कुमार, नई दिल्ली

सार

  • जनरेटर से प्रतिबंध से टेंट डीलर व्यवसायी पर पड़ेगी दोहरी मार
  • कोरोना महामारी से आर्थिक मंदी से जूझ रहे हैं कारोबारी
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नौटंकी का टेंट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण( ईपीसीए) ने आगामी 15 अक्तूबर से दिल्ली- एनसीआर में जनरेटर चलाने पर प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया है। जनरेटर पर प्रतिबंध लगने से लोगों के पास केवल प्रीपेड मीटर का ही विकल्प रहेगा। 

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जनरेटर व्यवसाय से जुड़े कारोबारी बॉबी ने बताया कि डीजल जनरेटर के मुकाबले प्रीपेड मीटर करीब डेढ़ गुना महंगा पड़ता है। उधर, ऑल इंडिया टेंट डीलर्स ऑर्गेनाइजेशन के सह सचिव किशन कुमार ने बताया कि पहले ही टेंट डीलर व्यवसाय कोरोना की वजह से आर्थिक मंदी से जूझ रहा है। प्रदूषण के कारण जनरेटर प्रतिबंध लगने से व्यवसाय आधे से भी कम हो जाएगा। 

उन्होंने बताया कि प्रीपेड बिजली मीटर के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना होता है। बिजली दफ्तर में आवेदन के साथ स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी लेना होता है। इसके साथ ही किसी पड़ोसी का भी बिजली का बिल लगाने के साथ-साथ शादी का कार्ड भी लगाना होता है।
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दिल्ली- एनसीआर में 50 हजार से अधिक जनरेटर
डीजल जनरेटर व्यवसाय से जुड़े लोगों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में  इस समय 50 हजार से अधिक डीजल जनरेटर हैं। इनमें कुछ व्यापारी ऐसे हैं जिनका व्यवसाय डीजल जनरेटर उपलब्ध कराने का ही है। ऐसे में व्यापारियों की चिंता है कि यदि प्रतिबंध को लेकर आदेश लागू हो जाता है तो कारोबार पूरी तरह से ठप हो जाएगा।

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