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वहां रोज 20 लोग नोच-नोच कर खाते थे मुझे...

Sun, 17 Sep 2017 02:34 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डेमो पिक
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ये आपबीती है एक 16 वर्षीय लड़की की जो शादी का झांसा देकर पश्च‌िम बंगाल से महज पांच महीने पहले द‌िल्ली लाई गई थी। लेक‌िन उसे क्या पता था क‌ि उसका जीवन यहां आकर नर्क बराबर होने वाला है। उसने तो अपने प्यार के साथ सुंदर सपने संजोए थे....
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डेमो पिक
पीड़‌िता बताती है ‌क‌ि पश्च‌िम बंगाल के रहने वाले एक आदमी ने उसे शादी का वादा कर प्रेम जाल में फांस लिया था। वह अक्सर उसकी मां के मोबाइल फोन पर कॉल कर उसके साथ घंटों बातचीत किया करता था। इससे वह धीरे-धीरे उसकी तरफ आकर्षित होने लगी और मई 2017 में वह चुपचाप अपना घरबार छोड़कर उसी शख्स के साथ चली गई। वह उसे पश्चमि बंगाल के डायमंड हार्बर से कोलकाता लेकर आया जहां से दोनों ट्रेन से दिल्ली पहुंचे।

उसने बताया जैसे ही वह राजधानी पहुंची उस आदमी ने उसे जीबी रोड पर एक दलाल के पास ले जाकर बेच दिया। बस वहीं उसके सारे सपने चकनाचूर हो गए। यहां उसे दो अन्य लड़कियों के साथ रखा जाता था। वहां उससे बड़ी दो लड़कियां और भी थी।

वह बताती है उन दोनों के साथ उसे एक छोटे से अंधेरे कमरा में रखा गया जिसे तहखाना कहा जाता था। पीड़िता बताती है क‌ि पहले दिन से ही उसे इंजेक्शन से नशीली दवाए दी जाने लगी। उसे कुछ होश नहीं रहा और उसी दिन से उसके साथ वहां आने वाले ग्राहकों ने उसके साथ सेक्स किया।
 

डेमो पिक
पीड़िता बताती है क‌ि उन्हें वहां दिन में केवल दो बार खाना दिया जाता था। इस बीच अगर कोई ग्राहक उनकी शिकायत करता तो पूरे दिन उन्हें खाना नसीब नहीं होता था। पीड़िता ने पुलिस को बताया पहले दिन से उसे वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर किया गया। वहां उसके पिता की उम्र के पुरुषों ने भी उसका यौन शोषण किया। केवल इतना ही नहीं कई बार ऐसे ग्राहक भी आते जो उनके साथ दरिंदगी की हद तक गुजर जाते और उनके साथ अप्राकृतिक सेक्स करते थे। उनकी घिनौनी मानसिकता का अंदाजा लगा पाना मुश्किल हो जाता था। वे जलती हुई सिगरेट से बदन दाग देते थे।

पीड़िता आगे बताती है क‌ि उनका काम सुबह 10 बजे शुरू हो जाता था। आकर्षक कपड़े और मेकअप लगाकर तैयार हो जाने के लिए उन्हें मजबूर किया जाता। सुबह 11 बजे से ही वेश्यालयों में ग्राहकों का आना-जाना लग जाता था। उसने बताया वहां उनसे शिफ्ट में काम लिया जाता। पहली शिफ्ट शाम के 4 बजे खत्म होती तो खाने को कुछ मिलता था। इसमें भी द‌िए गए खाने से ज्यादा नहीं मांग सकते थे। खाने में केवल दाल और रोटी व एक सब्जी दी जाती थी।

कुछ घंटों के आराम के बाद शाम की शफ्टि के लिए फिर से नहा-धोकर तैयार होना पड़ता था। फिर रात के 8 बजे से लेकर सुबह के 4.30 बजे तक काम लिया जाता। हमें ग्राहकों का मनोरंजन भी करना पड़ता था। अगर ग्राहक खुश होकर जाता तो हमें पूरा खाना नसीब होता था। इस बीच बाकी का ‌जितना वक्त बचता था हमें ऐसे तंग कमरे में सोने के ल‌िए के लिए भेज दिया जाता जिसमें करवट लेने तक में परेशानी होती थी।

 

डेमो पिक
पीड़िता बताती है क‌ि एक दिन उसने एक किशोर ग्राहक के सेलफोन से बड़ी मुश्किल से अपनी मां को फोन किया। उसने परिवारवालों को अपनी आपबीती बताई। उसने बताया वह दिल्ली के लाल-हल्के इलाके में है।

इसके बाद परिवार के लोगों ने फौरन ये जानकारी स्थ‌ानिय थाना को दी। बाद में दिल्ली पुलिस टीम से कॉर्डेनेट करने के बाद दिल्ली के लाल हल्के इलाके के वेश्यालयों पर छापेमारी की लेकिन पुलिस को लड़की को तलाशने में नाकाम रही।

इसके बाद पीड़िता की बहन जो नौ महीने की गर्भवती है, ने उस ग्राहक के फोन पर फोन किया और उसे अपने प्यार का झांसा देकर अपनी बहन का पता लगाने की कोशशि की। उस ग्राहक ने भी महिला की आवाज़ सुनने के बाद बातचीत शुरू कर दी। बहन ने उसमें झूठमूठ की रूची दिखाते हुए उसे बात करना जारी रखा और फिर उस लड़के से कहा क‌ि वह वहां आना चाहती है।
 

 
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डेमो पिक
उसने उसे दिल्ली आने के लिए कहा। लड़के ने ये भी कहा क‌ि वह खर्चे की च‌िंता बिल्कुल न करे। इसके बाद उसने अपनी तस्वीर और पता लड़की को भेज दिया। पीड़िता की बहन ने तुरंत ये जानकारी पश्चिम बंगाल पुलिस को भेज दी और फिर ये जानकारी दिल्ली पुलिस के पास गई।

इस व्यक्ति को बाराखंबा रोड पुलिस थाने में हिरासत में लिया गया और जिसने ये पुष्टि की कि वह लड़की जीबी रोड वेश्यालय में थी। उसके बाद दिल्ली पुलिस ने फिर से छापा मारा और इसमें एनजीओ शक्ति वाहिनी की सहायता भी ली। लेकिन एकबार फिर पुलिस असफल रही।

इस बीच दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल ने जीबी रोड पर 125 वेश्यालय के मालिकों को समन जारी किया और उन्हें पैनल के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा।

पुलिस छापों और डीसीडब्ल्यू के समन से लगातार बढ़ते दबाव में वैश्यालय के दलाल ने लड़की को रिहा करने के लिए सोचा। इसके बाद उसे डायमंड हार्बर स्टेशन पर एक व्यक्ति के साथ भेजा गया। उसने वहां ले जाकर लड़की को 3,000 रुपए थमाते वक्त ये कहा मामला शांत होते फिर से पैसे कमाने आ जाना।

उसने लड़की से ये भी कहा कि वह सारे पुलिस केस वापस ले ले। एक अंग्रेजी ऑनलाइन पोर्टल मेल टुडे से बात करते हुए पश्चिम बंगाल के बाल अधिकार आयोग के संरक्षण के सदस्य सुदेशा रॉय ने कहा कि वह शुक्रवार को पीड़िता से मिले थे। तब ये सारी बाते सामने निकल कर आई।
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