देश के पब्लिक सेक्टर बैंक डिफाल्टर्स घोषित हो चुकी कंपनियों को बार-बार कर्ज देकर जनता का पैसा लुटा रही है। यह आरोप लगाया है स्वराज अभियान के प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने।
उनका आरोप है कि यह सब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नियमों के खिलाफ हो रहा है। रिस्ट्रक्चरिंग ऑफ लोन के नाम पर उन लोगों को भी दोबारा पैसा दिया जा रहा है, जिनके खिलाफ सीबीआई तक कार्रवाई कर चुकी है। प्रशांत भूषण ने कहा डिफाल्टर्स होकर भी कर्ज पाने वालों में मोदी सरकार में राज्य मंत्री वाईएस चौधरी की कंपनी भी शामिल है।
प्रशांत भूषण प्रेस क्लब में ऐसे सात लोगों के केस स्टडी भी पेश की जिन कंपनियों को डिफाल्टर्स घोषित होने के बाद भी लोन दिया गया। इसमें भूषण स्टील, एस्सार समूह, किंगफिशर एयरलाइंस, जीटीएल कंपनी, गुप्ता ग्लोबल रिसोर्स कंपनी के अलावा मोदी सरकार में मंत्री वाईएस चौधरी की कंपनी सुजाना टावर्स लिमिटेड भी शामिल है।
लोन न चुकाने वाली कंपनी को भी दे रहे लोन
जिसकी कंपनी को ऑल इंडिया बैंक एंप्लाई एसोसिएशन ने डिफाल्टर घोषित किया था। उस कंपनी की कुल पूंजी महज 200 करोड़ थी फिर भी उसे 4000 करोड़ रुपये का लोन दिया गया। हालांकि यह लोन उन्हें मंत्री बनने से पहले लिया।
प्रशांत भूषण ने बताया कि बैंक समेत आरबीआई और सरकार यह जानती है कि रिस्ट्रक्चरिंग ऑफ लोन के नाम पर बैंक जनता का पैसा बड़े लोगों पर लूटा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि रिस्ट्रक्चरिंग ऑफ लोन का मतलब होता है कि अगर कोई लोन नहीं चुका पा रहा है, तो बैंक उसे लोन चुकाने के लिए उसके लोन चुकाने के समय को बढ़ा सकता है।
दोबारा से कुछ और लोन दे सकता है। मगर इसके नाम पर देश में लूट चल रही है। मिलीभगत से ऐसे लोग जो कि जानबूझकर (विलफुल डिफाल्टर्स) लोन नहीं चुकाने वालों को भी दोबारा लोन दे रही है।
पब्लिक सेक्टर बैंक का लोन के नाम दिए गए पैसे का ब्यौरा
प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव ने सरकार से इसे रोकने की मांग की है। उन्होंने कहा कि स्ट्रेस्ट एसेट्स, एनपीए और रिस्ट्रक्चरिंग ऑफ लोन पर श्वेत पत्र जारी करे। डिफाल्टर्स को लोन दिया गया है उनकी जांच के लिए एसआईटी का गठन हो।
स्वतंत्र बॉडी बने जो कि 100 करोड़ से ऊपर का लोन देने के मामले को देखे। उसे पब्लिक डोमेन पर डाले। सभी बड़े लोन, डिफाल्टर की जानकारी, को सार्वजनिक किया जाए। साथ ही अन्य कदम उठाए जाने चाहिए जिससे जनता के पैसा को लुटाया जा रहा है उसे रोका जाए।
फैक्ट फाइल
- 7,70,000 करोड़ रुपये स्ट्रेस्ड एसेट्स (लोन भुगतान में गड़बड़ी)
- 59,000 करोड़ लोन के रुपये गैर निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए)
- 2,67,000 करोड़ रुपये जानबूझ नहीं चुकाने वाले डिफाल्टर
- 4,03,004 करोड़ रुपये 30 जून 2015 तक लोन का रिस्ट्रक किया गया।
- 67,667 करोड़ रुपये मसलन 33 फीसदी हिस्सा फिर लोन चुकाने में विफल।
-16 फीसदी मसलन 83 केस ही रिस्ट्रक्चर ऑफ लोन चुकान में सफल रहे।