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चलती ट्रेन में तड़पती रही युवती, मौत

Mon, 12 Jan 2015 07:42 AM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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पिता के साथ दिल का वॉल्व बदलवाने फौलादपुर (गाजीपुर) से दिल्ली जा रही युवती की रविवार को ट्रेन में ही मौत हो गई। चलती ट्रेन में मेडिकल सुविधा न मिल पाने से बेबस पिता युवती को बचाने में विफल रहा।
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हापुड़ के पास दम तोड़ने के बाद युवती के शव को गाजियाबाद स्टेशन पर उतारा गया। यहां से परिजन एंबुलेंस से शव लेकर वापस फौलादपुर के लिए रवाना हो गए। अपनी आंखों के सामने युवती के दम तोड़ने की इस घटना से उसके पिता का रो-रोकर बुरा हाल था।

युवती के पिता कपिल देव सिंह ने बताया कि उनकी बेटी दीपिका (24) के हार्ट में वॉल्व डाला जाना था। गाजीपुर में चेकअप के बाद उसे ऑपरेशन के लिए दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल ले जाना था।
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शनिवार को वह गाजीपुर से दिल्ली के लिए छपरा-नई दिल्ली एक्सप्रेस से चले थे। सुबह करीब 5.30 बजे हापुड़ स्टेशन पर आकर दीपिका को हार्ट की तकलीफ हुई तो पिता दौड़कर स्टेशन से गर्म पानी ले आए।

गर्म पानी पीकर थोड़ी राहत मिली, लेकिन ट्रेन के हापुड़ से निकलने के बाद तकलीफ फिर बढ़ गई। पिता कपिल देव सिंह ने बताया कि बेटी को दवा देने के बाद भी राहत नहीं मिली और थोड़ी देर बाद उसने उनकी आंखों के सामने गोद में ही दम तोड़ दिया। ट्रेन में भी कोई मेडिकल सुविधा नहीं मिल सकी।

बेटी की मौत से बेसुध हुए कपिल ने दिल्ली और नोएडा में अपने रिश्तेदारों को इसकी खबर दी और गाजियाबाद स्टेशन पर ट्रेन रुकी तो दीपिका के शव को प्लेटफार्म नंबर-3 पर उतार लिया गया।

एसएसआई जीआरपी पंकज लवानिया ने बताया कि परिजनों से लिखित सूचना लेकर शव को उनके सुपुर्द कर दिया गया। परिजन एंबुलेंस से शव को घर ले गए।

‘हापुड़ स्टेशन पर उतर जाते तो बच जाती बेटी’
दीपिका के पिता कपिलदेव अब उस पल को कोस रहे हैं, जब वह हापुड़ स्टेशन पर बेटी को दवा देकर दिल्ली की ओर आगे बढ़े।

उनका कहना है कि काश! वह बेटी की तबियत बिगड़ने पर हापुड़ स्टेशन पर ही उतर जाते तो दीपिका को मेडिकल सुविधा मिल जाती। लेकिन गर्म पानी पीने और दवा लेने के बाद दीपिका की तबियत में सुधार होने पर वह आगे बढ़ गए। कुछ देर बाद उसकी तबियत फिर बिगड़ गई।

रोते-रोते वह कर रहे थे कि ईश्वर उनका साथ दे देता और बेटी गाजियाबाद स्टेशन तक जिंदा पहुंच जाती तो वह अस्पताल ले जाकर भी उसे बचा लेते। लेकिन अफसोस इस बात का है कि दोनों स्टेशनों के बीच यह हादसा हुआ।

ट्रेन में तबियत बिगड़े तो टीटीई को बताएं
स्टेशन पर मेडिकल स्टाफ तैनात रहता है। ट्रेनों में किसी यात्री की तबियत बिगड़ती है तो वह टीटीई को तुरंत इसकी सूचना दें। टीटीई कंट्रोल रूम को इसकी सूचना दे देंगे। अगले स्टेशन या हाल्ट पर ट्रेन को रोककर यात्री को तत्काल मेडिकल सुविधा दी जाती है। हापुड़ स्टेशन पर भी डॉक्टर तैनात हैं। - डॉ. राखी जैन, मेडिकल ऑफिसर, गाजियाबाद रेलवे स्टेशन

कोलंबिया एशिया अस्पताल के सीनियर कॉर्डियोलोजिस्ट डा. संजय मित्तल का कहना है कि 24 वर्षीया युवती को हार्ट अटैक नहीं हो सकता।

दिल के वॉल्व का अगर ऑपरेशन होना था तो परिजनों को ट्रेन का सफर नहीं करके एंबुलेंस से लाना चाहिए था, क्योंकि एंबुलेंस में प्राथमिक उपचार के उपकरण होते हैं। वॉल्व खराब होने और लेटे रहने से मरीजों के पैर में खून जमना शुरू हो जाता है।

यही जमा हुआ खून जब फेफड़ों तक पहुंचता है तो दिल को ठीक प्रकार से ऑक्सीजन नहीं मिलती और वह काम करना बंद कर देता है। दीपिका के साथ भी शायद ऐसा ही हुआ होगा।
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डाक्टरी सलाह क्या करें
इस प्रकार के हार्ट पेशेंट को ट्रेन से सफर की बजाय एंबुलेंस से ले जाना चाहिए।
हार्ट में दर्द होने या फिर घबराहट होने पर दिल पर प्रेशर डालकर उसे दबाना चाहिए।
अगर तत्काल ऑक्सीजन दिए जाने की व्यवस्था न हो तो उसे मुंह से ऑक्सीजन दी जानी चाहिए।
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