-सी-ब्लॉक की प्रमुख सड़क लंबे समय से बदहाल, बस डिपो मार्ग पर गड्ढों और गंदगी से बढ़ी परेशानी
-शाम को बाजार पहुंचने वाले लोग धूल से परेशान, रात में कई जगह बंद स्ट्रीट लाइट
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के यमुना विहार में लोगों के लिए सड़क की परेशानी सिर्फ गड्ढों तक सीमित नहीं है। सी-ब्लॉक की प्रमुख सड़क पर टूटे हिस्सों के साथ उड़ती धूल और रात में कई स्थानों पर बंद स्ट्रीट लाइट ने राहगीरों की मुश्किल बढ़ा दी है। दिन में वाहनों के गुजरने से धूल उड़ती है तो रात में खराब सड़क और कम रोशनी के कारण गड्ढे दिखाई नहीं देते। शाम के समय बाजार में बढ़ती आवाजाही के बीच यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
सी-ब्लॉक की प्रमुख सड़क लंबे समय से खराब स्थिति में है। सड़क के कई हिस्सों में सतह उखड़ी हुई है और जगह-जगह गड्ढे बने हैं। वाहनों के लगातार गुजरने पर सड़क से धूल उठती है। दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी होती है। इसी मार्ग पर एक सरकारी स्कूल, एक बड़ा निजी स्कूल, यमुना विहार का सबसे बड़ा पार्क, इलाके का प्रमुख मैरीज होम व जाफराबाद थाना स्थित है। यमुना विहार बस डिपो की ओर जाने वाली सड़क पर भी गड्ढों और गंदगी की समस्या है। यहां से दिनभर स्थानीय लोगों के साथ बस, ऑटो और निजी वाहनों की आवाजाही होती है। सड़क के किनारे जमा गंदगी और टूटे हिस्से रास्ते को और संकरा करते हैं। वाहनों के निकलने के दौरान धूल का गुबार आसपास तक पहुंचता है।
शाम को भीड़ से बढ़ जाती है परेशानी
यमुना विहार आसपास की कॉलोनियों के लोगों के लिए खरीदारी और खानपान का प्रमुख स्थान है। शाम के समय यहां लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। खाने-पीने की दुकानों के साथ कपड़े, मोबाइल, घरेलू सामान और अन्य जरूरत की दुकानें हैं। बाजार में कई बड़े ब्रांड के ज्वैलर्स के शोरूम भी मौजूद हैं।
शाम को पैदल ग्राहक, दोपहिया वाहन, कार और ऑटो एक साथ सड़क पर होते हैं। ऐसे समय में गड्ढों से बचने के लिए वाहन चालक अचानक रफ्तार कम करते हैं या दिशा बदलते हैं। इससे सड़क पर आवाजाही प्रभावित होती है। धूल उड़ने के कारण बाजार में आने वाले लोगों को कुछ देर सड़क पर रुकना भी असहज लगता है।
दिन की धूल और गड्ढों के बाद रात में बंद स्ट्रीट लाइट दूसरी बड़ी समस्या बन जाती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क के कुछ हिस्सों में स्ट्रीट लाइट काम नहीं कर रही हैं। खराब सड़क पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने से गड्ढे समय रहते दिखाई नहीं देते।