मेट्रो के एक पिलर पर वर्टिकल गार्डन विकसित करने का खर्च दो से तीन लाख रुपये आता है, लेकिन भविष्य में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। हालांकि, यात्रियों की जेब पर भारी-भरकम किराये का बोझ डालने वाली डीएमआरसी ने ही नहीं नोएडा को स्मार्ट बनाने का ख्वाब दिखा रहे नोएडा प्राधिकरण ने भी खर्च से बचने को हाथ खींच रखे हैं।
गाजियाबाद से लें सबक
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने प्रदूषण को कम करने के लिए अपने स्तर पर मेट्रो पिलरों को वर्टिकल गार्डन से ढकने का फैसला लिया है। दिलशाद गार्डन से बस अड्डे तक मेट्रो पिलर पर 60 लाख रुपये की लागत से वर्टिकल गार्डन विकसित किए जा रहे हैं। क्लोरोफाइटम, रोहिया, सघेनियम, स्पेथोफायलम जैसे पौधे लगाए जा रहे हैं, ताकि प्रदूषण का स्तर कम किया जा सके।
यह होंगे फायदे
- मेट्रो पिलर पर वर्टिकल गार्डन विकसित करने से सड़कों पर प्रदूषण का स्तर होगा कम।
- मेट्रो पिलर पर पोस्टर लगाकर इन्हें गंदा नहीं किया जा सकेगा, खूबसूरत दिखेंगे पिलर।
- जल एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए मददगार साबित हो सकते हैं वर्टिकल गार्डन।