विरोध इतना व्यापक था कि भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं लव कुश रामलीला के उपाध्यक्ष प्रवीण शंकर कपूर ने भी कमेटी के अध्यक्ष अर्जुन कुमार और महामंत्री सुभाष गोयल को पत्र लिखकर इस नियुक्ति पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
कमेटी के पदाधिकारियों ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में स्पष्ट कर दिया कि समाज की आस्था सर्वोपरि है और यदि किसी कलाकार की भूमिका से धार्मिक भावनाएं आहत होने की आशंका हो तो उस पर पुनर्विचार करना जरूरी है। इसी आधार पर निर्णय लिया गया कि इस वर्ष मंदोदरी का अभिनय किसी अन्य कलाकार से कराया जाएगा।
कमेटी का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल नाटकीय मंचन करना नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों और रामायण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। इसीलिए सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को सर्वोपरि रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
उधर, प्रवीण शंकर कपूर ने कमेटी के इस निर्णय का स्वागत किया और कहा कि पूनम पांडे को मंदोदरी की भूमिका से हटाना धार्मिक जगत एवं आम समाज की भावनाओं का सम्मान है।