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Delhi NCR News: युवतियों में तेजी से बढ़ रहा पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम

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- 17 से 19 साल की लड़कियों में दिख रही है समस्या, परिवार में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा बन रही समस्या
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। परिवार में बढ़ रहे मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप की समस्या लड़कियों को पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) दे रहा है। सफदरजंग, एम्स, डॉ. राम मनोहर लोहिया और लेडी हार्डिंग के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में आ रही हर दूसरी-तीसरी युवती इस समस्या से ग्रसित हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों के बदले जीवन शैली व खानपान के कारण यह समस्या पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। मौजूदा समय में 17 से 19 साल की उम्र की लड़कियों में यह समस्या ज्यादा मिल रही है। यह एक हार्मोनल विकार है जो प्रजनन आयु की महिलाओं को प्रभावित करता है। इसमें, अंडाशय में सिस्ट (छोटी-छोटी तरल पदार्थ से भरी थैलियां) बन जाती हैं और हार्मोन का स्तर असामान्य हो जाता है। इस कारण मासिक धर्म अनियमित हो सकता है। साथ ही बांझपन की समस्या, चेहरे पर बाल उगना, मुंहासे, और वजन बढ़ना सहित दूसरी परेशानी हो सकती है।
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लेडी हार्डिंग अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की पूर्व निदेशक प्रोफेसर डॉ. मंजू पूरी ने कहा कि इस दिनों यह समस्या काफी ज्यादा देखने को मिल रही है। इसका बढ़ा कारण युवतियों में वजन बढ़ने के साथ परिवार में मधुमेह और उच्च रक्तचाप की समस्या है।
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दिख सकते हैं यह लक्षण
- अनियमित या छूटे हुए मासिक धर्म
- चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल (चेहरे, छाती, पेट, पीठ)

- मुंहासे
- वजन बढ़ना या मोटापा
- बालों का झड़ना
- बांझपन
- पेल्विक दर्द
- चिंता और अवसाद


योग कर सकता है मदद
योग की मदद से पीसीओएस के लक्षणों को दूर किया जा सकता है। इसे लेकर एम्स के आणविक प्रजनन एवं आनुवंशिकी प्रयोगशाला, एनाटॉमी विभाग ने प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के साथ मिलकर शोध किया। इस बारे में एनाटॉमी विभाग की प्रोफेसर प्रो. रीमा दादा का कहना है कि योग मन-शरीर ऊर्जा चिकित्सा है। योग के विभिन्न आसन, प्राणायाम और ध्यान एकाग्रता को बढ़ाता है। एक प्रशिक्षित योग चिकित्सक के मार्गदर्शन में पीसीओएस से पीड़ित 15 महिलाओं पर प्रयोगशाला में एक प्रारंभिक पायलट अध्ययन किया गया था। अध्ययन का डाटा बताता है कि 9 सप्ताह का योग अभ्यास एंटी-मुलरियन हार्मोन, एलएस और टेस्टोस्टेरोन के स्तर को काफी हद तक कम कर सकता है। हार्मोन के स्तर में सामान्यीकरण मासिक धर्म चक्रीय पैटर्न में सुधार हो सकता है। कम टेस्टोस्टेरोन का स्तर पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में फेरिमैन-गैलवे स्कोर/हिर्सुटिज्म और मुंहासे में सुधार ला सकता है।
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