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दिल्ली में वायु प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता: ठंड की दस्तक के साथ खराब होने लगी हवा, आज एम्स के आसपास का एक्यूआई 255

Fri, 23 Oct 2026 07:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

 केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, प्रदूषण का असर दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दिया।
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फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली में ठंड की दस्तक के साथ ही हवा की गुणवत्ता खराब होने लगी है। दशहरे से एक दिन पहले जो हवा 'खराब' श्रेणी में नहीं थी उसके अगले ही दिन बिगड़ गई। कई इलाकों में एक्यूआई 250 के बार चला गया। कल भी ऐसा ही था और आज सवेरे भी कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता का स्तर 250 पार है। आज सवेरे एम्स के आसपास के इलाकों का एक्यूआई 255 दर्ज किया गया। 

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दिल्ली में प्रदूषण से राहत की उम्मीद के बीच हवा की गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है। बृहस्पतिवार रात आठ बजे तक दर्ज आंकड़ों में दिल्ली के 42 निगरानी स्टेशनों में से 32 पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 200 के पार रहा। इनमें 31 स्टेशन खराब और एक स्टेशन बहुत खराब श्रेणी में दर्ज किया गया। सबसे अधिक 306 एक्यूआई जहांगीरपुरी में रहा। वहीं, नौ स्टेशनों पर हवा मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई। 
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, प्रदूषण का असर दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दिया। विवेक विहार में एक्यूआई 295, चांदनी चौक में 287, पूसा के आईआईटीएम केंद्र पर 285, सोनिया विहार में 282 और रोहिणी में 281 दर्ज किया गया। बवाना और नरेला में एक्यूआई 270 रहा।

पीएम 2.5 का दबदबा
प्रदूषकों के स्तर पर भी महीन कणों की मौजूदगी प्रमुख रही। 42 में से 32 स्टेशनों पर पीएम 2.5 प्रमुख प्रदूषक के रूप में दर्ज किया गया, जबकि नौ स्टेशनों पर पीएम 10 प्रमुख रहा। वहीं, मैदान गढ़ी में ओजोन प्रमुख प्रदूषक के रूप में दर्ज हुई। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉय चौधरी ने बताया कि वाहनों से निकलने वाला धुआं दिल्ली की हवा को पूरे साल प्रभावित करता है। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां शुरू होते ही इसका असर प्रदूषण के स्तर में अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगता है। इसके उलट, पराली जलाने का प्रभाव एक खास अवधि में बढ़ता है। इसका असर इस बात पर भी निर्भर करता है कि पराली जलने वाले क्षेत्रों से हवा दिल्ली की ओर आ रही है या नहीं। 

आनंद विहार में वाहनों का भारी दबाव, एक्यूआई पहुंचा 190
आनंद विहार में वाहनों के भारी दबाव के चलते हवा एक बार फिर बिगड़ती नजर आ रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, 22 अक्टूबर को आनंद विहार का एयर क्वालिटी इंडेक्स 190 दर्ज किया गया है। स्थानीय निवासियों और राहगीरों का कहना है कि लगातार रेंगते वाहनों से निकलने वाला धुआं और उड़ती धूल इस क्षेत्र की हवा को लगातार जहरीला बना रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो अक्टूबर में प्रदूषण का ग्राफ लगातार ऊपर-नीचे हो रहा है। इससे पहले 21 अक्टूबर को एक्यूआई 207 और 14 अक्टूबर को 237 तक पहुंच चुका है। संवाद

प्रदूषण की शिकायत अनसुनी की तो रोजाना 2000 रुपये जुर्माना
औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण से जुड़ी शिकायतों को अनदेखा करने पर संबंधित एजेंसी को रोजाना 2000 रुपये जुर्माना चुकाना होगा। डीएसआईआईडीसी ने ग्रीन एप और 311 स्मार्ट सिटी एप पर मिलने वाली शिकायतों का तीन दिन में समाधान अनिवार्य किया है।  ओखला औद्योगिक क्षेत्र में सड़कों के गड्ढे भरने और निर्माण मलबा हटाने के लिए काम शुरू होने जा रहा है। दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम ने इसके लिए करीब 1.25 करोड़ रुपये जारी किए हैं।

काम की जिम्मेदारी ऐसी एजेंसी को दी जाएगी, जिसे निगम की तय शर्तों और गुणवत्ता के मानकों पर खरा उतरना होगा। काम के दौरान ग्रीन एप या 311 स्मार्ट सिटी ऐप पर प्रदूषण और मलबे से जुड़ी शिकायतों को अनदेखा करने पर एजेंसी को जुर्माना चुकाना पड़ेगा। एजेंसी को छह महीने के भीतर काम पूरा करना है। काम में देरी होने पर एजेंसी पर प्रतिदिन 10 हजार रुपये की पेनल्टी लगाई जाएगी। 

दिल्ली की सीमाओं पर नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन रोके जाएंगे
वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बृहस्पतिवार को विशेष पुलिस आयुक्त (यातायात) अजय चौधरी की अध्यक्षता में अंतरराज्यीय समन्वय बैठक हुई। इसमें पड़ोसी राज्यों और जिलों की पुलिस तथा संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में फैसला लिया गया कि जो अंतरराज्यीय और अंतर शहरी बसें नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन्हें दिल्ली की सीमा पर ही दूसरे मार्गों की ओर मोड़ दिया जाएगा। केवल इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-6 मानक वाली डीजल बसों को ही दिल्ली में प्रवेश की अनुमति होगी। प्रतिबंधित वाहनों को अंदर नहीं आने दिया जाएगा।

आईआईटीएम के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) के आंकड़े बताते हैं कि  प्रदूषण बढ़ाने में 21 अक्तूबर को परिवहन क्षेत्र का योगदान 21 फीसदी से अधिक था, जबकि बृहस्पतिवार को यह 19 फीसदी से ज्यादा रहा। अगले दो दिनों में इसके 15 से 20 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है। वाहनों से होने वाला प्रदूषण दिल्ली की हवा पर दबाव बनाए हुए है। पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है।

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