पराली के धुएं और हवा की गति कम होने से राजधानी में बृहस्पतिवार को प्रदूषण स्तर खतरनाक श्रेणी में पहुंच गया। शाम चार बजे तक औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 402 दर्ज किया गया। दिनभर छाए रहे स्मॉग के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
केंद्र के वायु चेतावनी व्यवस्था के अनुसार, बुधवार को पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश समेत पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की करीब तीन हजार घटनाओं का सीधा असर दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर पश्चिम भारत की हवा पर पड़ा।
राजधानी के प्रमुख हॉटस्पॉट क्षेत्रों में शामिल शादीपुर में एक्यूआई 406 दर्ज किया गया जबकि पटपड़गंज में 411, जहांगीरपुरी में 429 व विवेक विहार में 432 रिकॉर्ड हुआ। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे तक पार्टिकुलेट मैटर (पीएम)10 का स्तर 420 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया है, जो इस सीजन का सबसे अधिक रहा।
सफर के मुताबिक, बवाना में एक्यूआई 453 रिकॉर्ड किया गया, जबकि शादीपुर में 421, पटपड़गंज में 411, जहांगीरपुरी में 429, विवेक विहार में 432 और मुंडका में 427 रिकॉर्ड हुआ। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे तक पार्टिकुलेट मैटर (पीएम)10 का स्तर 420 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया है, जो इस सीजन का सबसे अधिक रहा। पीएम 10 का स्तर 100 ग्राम पर क्यूबिक मीटर से कम होने पर सुरक्षित माना जाता है। पीएम 10 बहुत सूक्ष्म तत्व होता है, जिसका व्यास 10 माइक्रोमीटर से भी कम होता है। यही वजह है कि यह आसानी से फेफड़ों में प्रवेश कर जाता है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के वायु मानक संस्था सफर के अनुसार, बुधवार को पराली जलने की वजह से पीएम 2.5 का स्तर 18 फीसदी दर्ज हुआ था, जबकि मंगलवार को यह 23 फीसदी, सोमवार को 16, रविवार को 19 और शनिवार को नौ फीसदी रहा था। सफर के अनुसार, स्थानीय प्रदूषण के कारण और उत्तर पश्चिम दिशा की ओर से आने वाली हवा के साथ आ रहे पराली के धुएं की वजह से राजधानी में पीएम 2.5 का स्तर बढ़ा है।
मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में हवा की अधिकतम गति आठ किलोमीटर प्रति घंटा और न्यूनतम तापमान 12.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन का सबसे कम तापमान रहा। यही वजह है कि इन दिनों प्रदूषण में बढ़ोतरी हो रही है।