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एम्स के डॉक्टरों का दावा, प्रदूषण से बढ़ रहा है जोड़ो का दर्द

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यह सुनने में अटपटा जरूर लगता है लेकिन एम्स के चिकित्सकों ने अध्ययन कर यह साबित कर दिया है कि दिल्ली में प्रदूषण से जोड़ों का दर्द बढ़ रहा है।
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वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से ऐसे मरीजों की तकलीफ और बढ़ जाती है। अध्ययन में सामने आया कि दक्षिण दिल्ली की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। महिलाओं को यह बीमारी ज्यादा होती है।

एम्स के रिय्मोटोलॉजी विभाग की ओर से कराए गए इस अध्ययन को शुक्रवार को जारी किया गया। अध्ययन अब अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित होने के लिए भेजा जाएगा।
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की रिय्मोटोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. उमा कुमार ने बताया कि एम्स में इस बीमारी के इलाज के लिए आने वाले मरीजों का पांच वर्षों तक अध्ययन किया गया।
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दक्षिणी दिल्ली का है सबसे बुरा हाल

दिल्ली को पांच जोन में विभाजित कर 500 मरीजों पर अध्ययन किया गया। प्रदूषण का सबसे खराब स्तर दक्षिण दिल्ली में रिकार्ड किया गया, इसी वजह से मरीजों की संख्या भी यहां ज्यादा मिली।

भारतीय मौसम विभाग की सलाह पर एम्स ने प्रदूषण का स्तर जांचने के लिए जनवरी-फरवरी, मई-जून, जुलाई-अगस्त और नवंबर-दिसंबर को चुना था। प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा नवंबर-दिसंबर में देखा गया।

डॉ. कुमार ने बताया कि अध्ययन में देखा गया कि जब-जब प्रदूषण का स्तर बढ़ता है तब-तब मरीजों की परेशानी बढ़ जाती। इसके अलावा 300 ऐसे लोगों पर भी अध्ययन किया गया जिन्हें जोड़ों का दर्द नहीं था।

दिल्ली में करीब 10 वर्षों से रह रहे लोगों के खून के नमूनों की जांच की गई। जिसमें पाया गया कि ब्लड में एएनए, एसीपी, आरएएफ का स्तर बढ़ा हुआ था।

ऐसे मरीजों को भी भविष्य में जोड़ों का दर्द (रिय्मोटॉयड आर्थ्राइटिस) का खतरा बना रहता है। डॉ. कुमार ने यह भी कहा कि यदि बार-बार गर्भपात हो रहा है तो यह रिय्मोटॉयड आर्थ्राइटिस के लक्षण हो सकते हैं।
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