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यमुना से प्रदूषण खत्म करने के लिए दिल्ली सरकार ने बनाया एक्शन प्लान

Fri, 08 Jan 2021 05:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली 
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यमुना नदी... - फोटो : पीटीआई
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यमुना में प्रदूषित पानी गिरने की वजह से उत्पन्न हो रहे झाग को देखते हुए दिल्ली सरकार ने नौ बिंदु वाला एक्शन प्लान तैयार किया है। प्लान को दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी की ओर से मंजूरी मिल गई है। अब इसे दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली विकास प्राधिकरण व निगम द्वारा क्रियान्वयन किया जाना है।

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प्लान के अनुसार, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार को दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी द्वारा तय किए गए मानक के अनुसार नजफगढ़ और हिंडन नाले से गिरने वाले पानी को शोधित करने के लिए कहा है। दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार हरियाणा व यूपी से गिरने वाले गंदे पानी की वजह से यमुना में अमोनिया की मात्रा बढ़ती है और पीने का पानी की आपूर्ति प्रभावित होती है।  वहीं, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग को आगामी 31 मार्च तक ओखला बैराज के पास से पानी में जमा काई को हटाने के लिए भी कहा गया है। काई की वजह से फास्फेट की मात्रा बढ़ती है। इससे यमुना में झाग भी बनता है। 

दिल्ली जल बोर्ड को आगामी 31 दिसंबर तक सभी अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर व्यवस्था को भी सुचारू रूप से करना है। तब तक के लिए  अनधिकृत कालोनियों से  सीवेज वेस्ट को इकट्ठा कर पंपिंग स्टेशन तक ले जाया जाएगा। जल शोधन संयंत्र को भी अगले वर्ष तक दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी द्वारा तय किए गए मानकों के अनुसार, उन्नत करना है।
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इस कड़ी में जल शोधन संयंत्र  कोरोनेशन पिलर आगामी 30 जून 2021 और ओखला में 31 दिसंबर 2022 तक पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया है । इनमें कोरोनेशन पिलर जल शोधन संयंत्र की क्षमता 70 एमजीडी और ओखला शोधन संयंत्र की क्षमता 154 एमजीडी प्रतिदिन हो जाएगी। वहीं, दिल्ली जल बोर्ड, डीडीए, निगम और पीडब्ल्यूडी नालों में गंदगी फेंकने के लिए 50 हजार तक का चालान भी करेगी। 

प्लान के मुताबिक, आगामी 31 मार्च तक डीडीए को यमुना किनारे बसे धोबी घाट समेत अन्य अतिक्रमण को भी हटाया जाने का प्रावधान किया गया है। प्लान के मुताबिक यमुना में सफेद झाग फास्फेट और अन्य सर्फेक्टेंट की अधिक मात्रा में होने की वजह से उत्पन्न होते हैं। हरियाणा और यूपी से निकलने वाले गंदे नालों के पानी को बिना शोधित के यमुना में छोड़ जाना फास्फेट व अन्य प्रदूषित तत्वों का प्रमुख कारण बताया गया है। बैराज से पानी छोड़ जाने पर फास्फोरस युक्त  कंपाउंड यमुना के तलहटी में जमा हो जाता है जिसके बाद झाग उत्पन्न होते हैं। 

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