पूर्ण राज्य का दर्जा देने में समस्या व टकराव की संभावना
दरअसल दिल्ली का बुनादी ढांचा ही ऐसा है कि इसे पूर्ण राज्य का दर्जा देने से कई समस्याएं व टकराव की संभावना ज्यादा नजर आती हैं। इसी के चलते हर बार यह मांग दबकर रह जाती है। दिल्ली देश की राजधानी है और संसद से लेकर सभी केंद्रीय कार्यालय, विभिन्न देशों के दूतावास, उनके निवास स्थान दिल्ली में ही है।
कई बार आवाज उठी कि नई दिल्ली पालिका परिषद क्षेत्र को दिल्ली से अलग रखकर अन्य क्षेत्र की दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान कर दिया जाए। एनडीएमसी क्षेत्र को अलग करने से भी इस समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा।
विश्वभर के दूतावास व अधिकारियों के सुरक्षा का जोखिम
यदि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान किया जाता है तो कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर होगी, लेकिन केंद्र सरकार किसी भी हालत में विश्वभर के दूतावास व उनके अधिकारियों की सुरक्षा का जोखिम उठाने को तैयार नहीं है। दूतावास व उनके अधिकारियों के निवास मात्र एनडीएमसी क्षेत्र में ही नहीं अन्य इलाकों में भी है। ऐसे में कुछ भी घटना होने पर पूरे विश्व में देश का नाम खराब होगा।
अधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार क्षेत्र भी बड़ा विवाद
अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी अधिकार क्षेत्र भी विवाद रहा है। वहीं पुलिस राज्य सरकार के अधीन करने से दोनों सरकारों के बीच टकराव की स्थिति कभी भी हो सकती है। यही कारण है कि केंद्र कानून व्यवस्था की आड़ लेकर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने से बचती रही है।