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कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने का फैसला हुआ नहीं, श्रेय लेने की होड़ लग गई

Thu, 18 Jul 2019 05:12 PM IST
Trainee Trainee डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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राजनीतिक दल काम करने से ज्यादा, काम का श्रेय लेने की होड़ में रहते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने के मामले में भी होता दिख रहा है। आज गुरुवार को जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एलान किया कि कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने का फैसला ले लिया गया है और केंद्र सरकार भी इस पर सहमत हो गई है, भाजपा भी इस मैदान में कूद गई और उसने कहा कि कच्ची कॉलोनियों को पक्की करने का फैसला अरविंद केजरीवाल की कोशिश पर नहीं लिया गया, बल्कि यह केंद्र सरकार की पहल का नतीजा है। इससे यह साफ हो गया है आगे आने वाले समय में इस मुद्दे पर और भी राजनीति होने वाली है। इसी बीच यह जानना भी जरूरी है कि कच्ची कॉलोनियों को पक्की करने के बीच अभी भी कुछ तकनीकी अड़चनें बाकी हैं।

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केजरीवाल ने क्या किया दावा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यह बताया कि उनकी कैबिनेट ने दो नवंबर 2015 को ही एक कैबिनेट बैठक कर कच्ची कॉलोनियों को पक्की करने का फैसला ले लिया था। उसके बाद इसको स्वीकार करने का प्रस्ताव केंद्र के पास भेजा गया था। केजरीवाल के मुताबिक केंद्र सरकार ने अब तक उस प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी थी। केंद्र की तरफ से बुधवार 17 जुलाई को इस पर सहमति मिली है। इससे अब कॉलोनियों को पक्की करने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, अरविंद केजरीवाल ने यह भी साफ किया कि केंद्र ने कुछ मुद्दों पर तकनीकी सवाल पूछे हैं जिनका जवाब दिया जाना है, लेकिन यह कॉलोनियों को पक्का करने की राह में रोड़ा नहीं बनेगा। 

मनोज तिवारी ने कहा, हमने किया फैसला

दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने केजरीवाल के दावे को 'झूठा' करार दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने का फैसला केजरीवाल सरकार की पहल पर नहीं लिया गया है, बल्कि केंद्र ने बहुत पहले ही इसकी योजना बना ली थी। अरविंद केजरीवाल सरकार से इसके लिए कुछ जानकारी मांगी गई थी, लेकिन उन्होंने जवाब देने के लिए दो साल का समय मांगा था। दूसरी बार प्रयास करने पर भी उन्होंने दो साल का समय मांगा जिसकी वजह से कॉलोनियों को पक्का करने में देरी हुई। 

तिवारी ने कहा कि कुछ समय पहले दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल की उपस्थिति में एक बैठक में इस सवाल पर विचार किया गया था कि क्या दिल्ली की कॉलोनियों को पक्का किया जा सकता है। इसके बाद यह प्रस्ताव केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी के पास भेजा गया। इस प्रस्ताव को सहमति मिलने से यह साफ हो गया था कि दिल्ली सरकार के न चाहने के बाद भी कॉलोनियों को पक्का किया जा सकता है। तिवारी ने आरोप लगाया कि इसके बाद अरविंद केजरीवाल इस मुद्दे पर सक्रिय होने के लिए मजबूर हुए। 

चुनावी मुद्दा बनेगा

दिल्ली में कुल 1797 कच्ची कॉलोनियां हैं जिनके पक्का करने का मुद्दा गरमा गया है। वायदे के बाद भी कॉलोनियों को पक्का करने का रास्ता आसान नहीं होगा। कॉलोनियों को पक्का करने के लिए सभी कच्ची कॉलोनियों की मार्किंग या सीमांकन का काम किया जाना जरूरी होगा। इसमें काफी समय लग सकता है। 

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दरअसल, दिल्ली की कॉलोनियों के पक्का होने से इनके फ्लैट और घर खरीदने के लिए बैंक लोन देना शुरू कर देंगे। इन कॉलोनियों में विकास के कामों में भी तेजी आएगी। यही कारण है कि यह आने वाले चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकता है। इसीलिए दोनों पक्ष इस मुद्दे पर होड़ लेने के लिए आगे आ गए हैं। 
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