संत रविदास मंदिर को लेकर फिर सियासत शुरू हो गई है। आम आदमी पार्टी ने तुगलकाबाद स्थित इस मंदिर को तोड़े जाने का आरोप भाजपा पर मढ़ा है। पार्टी का कहना है कि भाजपा ने संत रविदास के मंदिर को तोड़कर अनुसूचित जाति के करोड़ों लोगों की आस्था को ठेस पहुंचाई है।
आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि संत रविदास साल 1509 में तुगलकाबाद के उस क्षेत्र में आए थे, जहां उनका मंदिर बना हुआ है, जिसके साक्ष्य भी मौजूद हैं। बावजूद भाजपा शासित दिल्ली विकास प्राधिकरण ने सैकड़ों साल पुराने इस मंदिर को तोड़ दिया। जब देश के कई संगठनों और दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम और अंबेडकर नगर के विधायक अजय दत्त ने विरोध में आंदोलन किया तो घबराकर भाजपा के नेता बयान जारी करने लगे।
सांसद ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने अजा समाज की आस्था को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी को पत्र लिखकर संत रविदास मंदिर की भूमि को डिनोटिफाई करने की मांग की है। इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार स्वीकार करती है, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। देश की जनता को पता चल जाएगा कि भाजपा की मंशा क्या है।
उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण की अनुमति मिलते ही दिल्ली सरकार जनता के सहयोग से उसी जगह पर भव्य मंदिर का निर्माण करेगी। प्रेस वार्ता में मौजूद कैबिनेट मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि भाजपा कहती है कि मंदिर तोड़ने का आदेश कोर्ट ने दिया। लेकिन सवाल यह उठता है कि यह मामला कोर्ट में गया कैसे। पुराने दस्तावेजों को देखा जाए तो तालाब और रविदास मंदिर दोनों ही जमाबंदी में उल्लेखित हैं। सरकार चाहती तो इस मंदिर को बचा सकती थी।