-दिल्ली सरकार की घोषणा के बाद एनएसयूआई ने उठाए सवाल
-एबीवीपी ने एनएसयूआई पर साधा निशाना, राजनीति करने का लगाया आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में मतदान से महज दो दिन पहले हॉस्टल का मुद्दा कैंपस की सियासत के केंद्र में आ गया है। मंगलवार को दिल्ली सरकार की ओर से 10 हजार छात्रों के लिए हॉस्टल बेड उपलब्ध कराने की घोषणा के बाद एनएसयूआई और एबीवीपी आमने-सामने आ गए हैं। एनएसयूआई ने घोषणा की टाइमिंग व योजना की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, जबकि एबीवीपी ने इसे छात्रों की लंबे समय से चली आ रही मांग की दिशा में कदम बताते हुए एनएसयूआई पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि छात्र लंबे समय से सुरक्षित व किफायती आवास की मांग कर रहे हैं, ऐसे में चुनाव से ठीक दो दिन पहले घोषणा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने सत्या निकेतन हादसे का जिक्र करते हुए पूछा कि उस समय छात्रों की सुरक्षा व आवास पर क्या कदम उठाए गए थे। एनएसयूआई ने यह भी पूछा कि हॉस्टल कहां बनेंगे, निर्माण कब तक पूरा होगा और छात्रों से कितना शुल्क लिया जाएगा। जाखड़ ने कहा कि एनएसयूआई हॉस्टल के खिलाफ नहीं है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले हुई घोषणा की टाइमिंग व योजना की जानकारी पर सवाल उठना लाजिमी है।
एबीवीपी दिल्ली प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि जब छात्र लंबे समय से हॉस्टल की कमी उठा रहे थे, तब अब 10 हजार बेड की व्यवस्था की घोषणा पर सवाल क्यों खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्या निकेतन की घटना के समय मलबे पर हथौड़ा चलाकर रीलबाजी करने से लेकर अब 10 हजार बेड की घोषणा पर एनएसयूआई राजनीति कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि एनएसयूआई छात्रों की हॉस्टल समस्या का समाधान चाहती है या केवल राजनीति कर रही है।