पुलिस अधिकारी ने बताया कि देखने में आया है कि वीआईपी की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी किसी न किसी मानसिक तनाव से जूझ रहे होते हैं। इस कारण कई डिप्रेशन में चले जाते हैं। डिप्रेशन में किसी तरह का खतरनाक कदम उठा लेते हैं। ऐसे में वीआईपी की सुरक्षा खतरे में बनी रहती है। अधिकारी ने बताया कि अब मनोवैज्ञनिक जांच के बाद ही कर्मियों को किसी वीआईपी की सुरक्षा में तैनात किया जाएगा। साथ ही अभी जो कर्मी सुरक्षा में तैनात हैं, उनकी भी मनोवैज्ञानिक जांच कराई जाएगी।
अपराध श्रेणी के तहत डोजियर दूसरी प्राथमिकता
पुलिस आयुक्त के पत्र में अपराध श्रेणी के तहत डोजियर (अपराधी का पूरा विवरण) दूसरी प्राथमिकता है। अभी हर जिले व यूनिट में एक डोजियर सेल होती है। अगर किसी जिले में 15 थाने हैं तो सभी थानों द्वारा पकड़े गए अपराधियों को डोजियर बनवाने के लिए डोजियर सेल जाना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर औसतन एक दिन में 150 अपराधियों का डोजियर बनता है। ऐसे में पुलिसकर्मियों के समय व संसाधन का दोहन होता है।
हर थाने में अपराधियों का डोजियर बनाया जाएगा
दिल्ली पुलिस आयुक्त ने पत्र में कहा कि अब दिल्ली के हर थाने में अपराधियों का डोजियर बनाना शुरू किया जाएगा। अपराधी के फिंगर प्रिंट व अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिटेल लेने के लिए मशीन खरीदना शुरू किया जाएगा। डोजियर में अपराधियों को पूरा विवरण होता है। इससे अपराधी की पूरी जानकारी मिल जाती है। साथ ही डोजियर से अपराधी भी तुरंत पकड़े व पहचाने जाते हैं। सभी जिला पुलिस उपायुक्त ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
ऑनलाइन होगा, किसी भी थाने में बैठकर देखा जा सकेगा
दिल्ली पुलिस अधिकारी ने बताया कि बदमाशों के डोजियर को ऑनलाइन भी किया जाएगा। इससे बदमाशों के डोजियर को कोई भी पुलिसकर्मी किसी भी पुलिस स्टेशन में बैठकर देख सकेगा। इससे बदमाशों को पकड़ने में भी आसानी होगी। अभी एक जिले के पुलिस कर्मी दूसरे जिले के बदमाश का डोजियर लेने उस जिले में जाते हैं।