लॉकडाउन के एक माह में पुलिस को नियमों का पालन कराने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। प्रवासी मजदूरों का पलायन रोकने से लेकर निजामुद्दीन के मरकज को खाली कराना बड़ी चुनौती थी। दूसरों की जान की हिफाजत करते-करते इस दौरान 21 से अधिक पुलिसकर्मी संक्रमण की चपेट में आ गए।
इस दौरान, देश के लोगों के बीच पुलिस का मानवीय चेहरा उभरा। पुलिसकर्मियों ने ज्यादातर मौकों पर जरूरतमंद लोगों की मदद की। भूखों को खाना खिलाया। इलाके के बुजुर्ग लोगों का ध्यान रखा। जरूरतमंदों को राशन देने का काम भी बखूबी किया।
हालांकि, हॉटस्पाट में किसी को भी बाहर न निकलने देने के काम में लगी पुलिस टीमों को जगह-जगह विरोध का सामना भी करना पड़ा। जमातियों को संभालने में भी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिसकर्मियों को अभद्रता भी झेलनी पड़ी, लेकिन उनका विश्वास जरा भी नहीं डगमगाया।
सोशल मीडिया से लेकर हेल्पलाइन नंबर तक, कहीं भी मदद की कॉल आते ही पुलिस मौके के लिए दौड़ पड़ती है। शुक्रवार तक पुलिस के हेल्पलाइन नंबर पर अब तक 28,549 कॉल आ चुकी हैं। इनमें से कई गर्भवती महिलाएं थीं, जो अस्पतालों तक नहीं पहुंच पा रही थीं।