अगर यह मॉडल नोएडा में शुरू होगा तो अपराध का ग्राफ भी कम होगा। स्लम में रहने वाले बच्चों को पढ़ाई का माहौल मिल नहीं पाता है। इस कारण ऐसे बच्चे कम उम्र से ही अपराध की तरफ चले जाते हैं। ये बच्चे बड़े होने बड़े अपराध करते हैं।
ऐसे अपराध में लिप्त हैं बच्चे
स्लम के बच्चे पढ़ाई-लिखाई नहीं होने व अच्छा माहौल नहीं मिलने से नशा करने लगते हैं। नशे की आदत में पड़ने के बाद उन्हें पैसों की जरूरत होती है। इसके लिए वह चोरी, लूट व स्नेचिंग की वारदात अंजाम देते हैं। इस योजना से बच्चों के भविष्य को बेहतर किया जा सकता है। पढ़ाई करने के बाद बच्चों का आर्थिक पुनर्वास भी आसानी से होगा।
एसपी क्राइम अशोक कुमार सिंह ने बताया कि, पुलिस वॉयस क्लब का मॉडल अच्छा है। एचसीएल फाउंडेशन की तरफ से इस बारे में बातचीत हो रही है। उच्च अधिकारियों से बातचीत के बाद इस मॉडल को नोएडा में लागू किया जाएगा। इससे बाल अपराध में भी कमी आएगी।