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पुलिस ने अदालत में कहा महाभारत की तरह षड्यंत्र था उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुआ दंगा

Thu, 17 Dec 2020 10:44 PM IST
Mohit Mudgal पीटीआई, नई दिल्ली
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दिल्ली हिंसा - फोटो : अमर उजाला
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 दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को कहा कि जिस प्रकार संस्कृत महाकाव्य महाभारत षड्यंत्र की एक कहानी थी, उसी प्रकार उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे भी कथित षड्यंत्र थे, जिसके ‘धृतराष्ट्र’ की पहचान किया जाना अभी बाकी है।

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अदालत से जमानत का अनुरोध करने वाली आरोपी ने पुलिस की दलील की तरह अपनी दलील देते हुए कहा कि यह मामला रामायण की तरह भी नहीं हो सकता, जहां हमें बाहर आने के लिए 14 वर्ष इंतजार करना पड़ जाए।

अभियोजन और बचाव पक्ष, दोनों ने अपनी दलील रखने के लिए आज के समय की तुलना पौराणिक ग्रंथों- रामायण और महाभारत- के किरदारों से की। जेएनयू की छात्रा और ‘पिंजरा तोड़’ मुहिम की सदस्य नताशा नरवाल की जमानत याचिका पर बहस के दौरान ये दलीलें दी गईं।
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नरवाल को कथित रूप से दंगों की पूर्वनियोजित साजिश में भाग लेने को लेकर विधि विरुद्ध गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। उनके वकील ने कहा कि नरवाल के विरुद्ध अभियोजन पक्ष ने एक ‘चक्रव्यूह’ की रचना की है और आरोपी महाभारत के अभिमन्यु की तरह इससे निकलने का प्रयास करेंगी।

आरोपी की ओर से दलील दी गई कि उनके विरुद्ध दाखिल किया गया आरोप पत्र, महाभारत के बाद दूसरा सबसे बड़ा दस्तावेज है। इस पर, पुलिस की ओर से पेश हुए विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने कहा कि ‘दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप’ (डीपीएसजी) नामक व्हाट्सएप ग्रुप संजय के किरदार की तरह है, जो धृतराष्ट्र को हर चीज सुनाता है।

प्रसाद ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत को बताया कि डीपीएसजी ने कथित तौर पर सभी प्रदर्शन स्थलों की निगरानी की और वहां की कमान संभाली तथा इसका लक्ष्य विरोध प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि ‘चक्का जाम’ करना था और इसकी परिणति हिंसा के रूप में होने वाली थी।

अभियोजक ने कहा कि आरोपी के वकील ने कहा कि आरोप पत्र महाभारत के बाद सबसे बड़ा दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि महाभारत 22,000 पृष्ठों का था और आरोप पत्र 17,000 पृष्ठों का है। मैं यह कहना चाहता हूं कि महाभारत एक षड्यंत्र की कहानी थी और संयोगवश यह मामला भी एक षड्यंत्र का है। महाभारत में संजय था, जो  सब कुछ देख सकता था।

उन्होंने कहा कि इस षड्यंत्र का संजय डीपीएसजी है। संजय सब कुछ धृतराष्ट्र को सुना रहा था। यहां धृतराष्ट्र की पहचान अभी नहीं हो पाई है।

नरवाल की ओर से पेश हुए वकील अदित पुजारी ने कहा कि पिछली आठ सुनवाई में अभियोजन द्वारा एक चक्रव्यूह की रचना की गई है। हमारा प्रयास अभिमन्यु जैसा होगा, ताकि हम इसे भेद सकें। यह स्पष्ट है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि आरोपपत्र से प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता।

पुजारी ने कहा कि यह मामला रामायण नहीं होने जा रहा है, जहां हमें इससे बाहर निकलने के लिए 14 साल का इंतजार करना पड़े। जो होगा यहीं और अभी होगा। वीडियो कांफ्रेंस के जरिए हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष, दोनों के वकीलों के कंप्यूटर बीच में ही ठप्प हो गए, जिन्हें फिर से चालू किया गया और आगे की दलील पेश की गई।

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