हाइटेक जिलों में शुमार होने के बाद भी गौतमबुद्ध नगर की पुलिस सुविधाएं पिछड़ी हुई हैं। जेवर समेत आसपास के लोगों को डायल 100 से आपातकालीन मदद नहीं मिल पा रही है।
क्षेत्र की कॉल बुलंदशहर या मेरठ पहुंच रही है। समस्या का समाधान करने के बजाय पुलिस अधिकारी एक दूसरे के पाले में गेंद पास कर रहे हैं। जिला गौतमबुद्धनगर का गठन 19 साल पहले 1997 में बुलंदशहर व गाजियाबद के क्षेत्र को काटकर किया गया। जेवर तहसील गौतबुद्धनगर बनने से पहले बुलंदशहर जिले का हिस्सा हुआ करती थी।
जिला बनने के बाद जेवर को नोएडा कंट्रोल रूम से इमरजेंसी पुलिस सहायता के लिए जोड़ दिया गया लेकिन 100 नंबर को खुद मदद की जरुरत पड़ रही है। कॉल बुलंदशहर या मेरठ में रिसीव होती है, जिससे यहां के लोगो को आपातकाल में पुलिस साहयता नहीं मिल पाती है।
प्रदेश सरकार के दावे हवा हवाई
प्रदेश सरकार एक तरफ पुलिस की कार्यशैली में बदलाव लाने के साथ साथ लोगों को बेहतर जनशक्ति संसाधन के माध्यम से किसी भी परिस्थिति में त्वरित साहयता न्यूनतम समय में उपलब्ध कराने की बात करती है लेकिन जिले की जेवर तहसील के लोगो को 19 साल बाद भी 100 पुलिस डायल से जिले में संर्पक न हो पाना सरकार के दावों की पोल खोल रहा है।
यमुना एक्सप्रेस वे विदेशियों को भी होती है परेशानी
यमुना एक्सप्रेस वे से गुजरने वाले देश व विदेश के लोगों को अकसर इस परेशानी का सामना करना पड़ता है। जरुरत के समय ये सुविधा काम नहीं आई है। जेवर क्षेत्र से कॉल करने पर ज्यादातर बुलंदशहर पुलिस कंट्रोल रूम में बात होती है जो पीड़ित को जिले का लैंडलाइन नंबर बात खत्म कर देते हैं।
होली के हुड़दंग में भी नहीं मिला 100 नंबर
होली पर जेवर क्षेत्र के दर्जनों गांवों में मारपीट की घटनाएं सामने आई। भले ही पुलिस ने अपनी गुडविल दिखाने के लिए ज्यादातर घटनाओं में आपसी समझौते कराकर मामलों को निपटा दिया हो लेकिन मारपीट की घटनाओं में पीड़ित लोगों ने कहा कि अगर 100 नंबर की मदद मिलती तो झगड़े की नौबत नहीं आती।
100 नंबर डायल करने पर दूसरे जिलों में कॉल लगना एक तकनीकी समस्या हो सकती है। टेक्निकल डिपार्टमेंट से बात कर समस्या का समाधान किया जाएगा। जब तक सही नही होता तब तक पड़ोसी जिलों के कंट्रोल रूम को सूचना भेजी जाएगी कि जो भी कॉल गौतमबुद्ध नगर जिले की हो वह सूचना संबंधित थाना क्षेत्र में ट्रांसफर कर दी जाए। अभिषेक यादव, एसपी देहात