तुरंत डिलीवरी के नाम पर दोगुने से भी ज्यादा पैसे वसूले जा रहे
शहर में एलपीजी गैस की कमी के बीच अब कालाबाजारी भी तेजी से बढ़ने लगी है। लोगों का आरोप है कि कुछ गैस सिलेंडर डिलीवरी करने वाले आम उपभोक्ताओं की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि अगर किसी को तुरंत गैस सिलेंडर चाहिए, तो उसे 2 घंटे में सिलेंडर दिलाने के नाम पर करीब 2500 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। इतना पैसा देने के बाद भी सिलेंडर मिलने की कोई पक्की गारंटी नहीं दी जा रही है। ऑल द्वारका रेजिडेंट्स फेडरेशन के प्रतिनिधियों का आरोप है कि गैस एजेंसी पर मिलने वाला सिलिंडर करीब 1000 रुपये के आसपास पड़ता है, लेकिन घर पर तुरंत डिलीवरी के नाम पर दोगुने से भी ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं। गैस की कमी और लंबी कतारों के कारण कई लोग मजबूरी में ज्यादा पैसे देकर सिलिंडर मंगाने को तैयार हो रहे हैं।
2 घंटे में सिलेंडर देने का दावा
द्वारका के कई निवासियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई दिनों से गैस सिलिंडर नहीं मिल रहा था। ऐसे में एजेंसी पर सुबह से लाइन में लगना पड़ता है और कई बार नंबर आने से पहले ही सिलिंडर खत्म हो जाता है। ऐसे में कुछ लोग 2 घंटे में सिलिंडर दिलाने की बात कहते हैं, लेकिन इसके लिए 2500 रुपये तक मांगते हैं। वहीं, एक गृहिणी ने बताया कि द्वारका में गैस पाइपलाइन नहीं है। ऐसे में वह सिलिंडर पर निर्भर है। गैस की किल्लत के कारण घर की रसोई चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने सुना है कि कुछ लोग ज्यादा पैसे लेकर तुरंत सिलिंडर दिलवा देते हैं, लेकिन इतनी बड़ी रकम देना हर किसी के लिए संभव नहीं है।
गैस संकट की आग शादियों तक पहुंची, मेन्यू में हो रही कटौती
शहर में एलपीजी और कमर्शियल गैस की कमी का असर अब शादियों और बड़े समारोहों पर भी दिखाई देने लगा है। गैस की अनियमित आपूर्ति के कारण लोगों को शादी-ब्याह के कार्यक्रमों में खाने के मेन्यू में कटौती करनी पड़ रही है। कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले जहां शादी में 20 से 25 तरह के व्यंजन तैयार किए जाते थे, वहीं अब लोग खर्च और गैस की कमी को देखते हुए 30 से 40 फीसदी तक आइटम कम कर रहे हैं। कई परिवार केवल मेन कोर्स तक ही ऑर्डर दे रहे हैं। कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों के अनुसार, गैस सिलिंडर समय पर नहीं मिलने से उन्हें खाना बनाने में दिक्कत हो रही है। ऐसे में कई बार उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर अतिरिक्त सिलिंडर या अन्य ईंधन का सहारा लेना पड़ता है, जिससे लागत भी बढ़ रही है। इसका सीधा असर उनके कारोबार पर पड़ रहा है। कैटरिंग संचालक राजेश कुमार ने बताया कि पहले शादी में स्टार्टर, मिठाई और कई तरह के स्नैक्स बनाए जाते थे, लेकिन अब लोग मेन्यू छोटा कर रहे हैं। गैस की कमी के कारण हमें भी परेशानी हो रही है। कई बार सिलिंडर की व्यवस्था करने में काफी भागदौड़ करनी पड़ती है।
चाय और फास्टफूड विक्रेताओं की परेशानी बढ़ी
कमर्शियल गैस सिलिंडर की कमी का असर अब छोटे कारोबारियों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ढाबे, रेस्टोरेंट, फास्टफूड और चाय की दुकान चलाने वाले दुकानदार गैस न मिलने से परेशान हैं। उनका कहना है कि पिछले करीब पांच दिनों से उन्हें कमर्शियल गैस सिलिंडर नहीं मिल पाया है। ऐसे में दुकान बंद न करनी पड़े, इसलिए कई दुकानदार मजबूरी में अपने घरों से घरेलू सिलिंडर लाकर काम चला रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि अगर जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो उनका कारोबार ठप होने की कगार पर पहुंच सकता है। गैस की कमी के कारण उन्हें रोजाना आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। चाय विक्रेता रमेश यादव ने बताया कि पिछले कई दिनों से कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहा है। मजबूरी में घर से सिलिंडर लाकर चाय बना रहे हैं, नहीं तो दुकान बंद करनी पड़ती। वहीं, फास्टफूड मनोज कुमार ने कहा बताया कि गैस की कमी से कामकाज प्रभावित हो रहा है। अगर यही हाल रहा तो कारोबार चलाना मुश्किल हो जाएगा।