पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की सेक्टर-पाई 1 स्थित ऐच्छर गांव शाखा में ग्राहकों के खातों से 10.24 करोड़ रुपये के कथित फर्जीवाड़े में ऑफिस असिस्टेंट दीपांशी की प्रमुख भूमिका सामने आई है।
ऑफिस असिस्टेंट को नहीं था वित्तीय लेन-देन का अधिकार
दीपांशी ऑफिस असिस्टेंट यानी सब स्टाफ के पद पर कार्यरत थी। बैंक की डेलीगेशन मैट्रिक्स के मुताबिक, उसे इस तरह के वित्तीय लेन-देन स्वतंत्र रूप से करने का अधिकार नहीं था। इसके बावजूद उस पर पद और सिस्टम तक अपनी पहुंच का दुरुपयोग करने का आरोप है। बैंक ने सेवा आचरण संहिता के उल्लंघन और वाउचर नष्ट करने की आशंका भी जताई है। सिस्टम लॉग और यूजर एक्टिविटी रिकॉर्ड में लंबे समय तक संदिग्ध गतिविधियां दर्ज मिली हैं।
आठ लोगों के नाम, दीपांशी घर से गायब
बैंक की तहरीर में दीपांशी और आशुतोष समेत आठ लोगों के नाम दर्ज हैं। इनमें साकीपुर निवासी दीपांशी, ऐच्छर निवासी आशुतोष पाठक, प्रदीप कुमार, मेंबंती देवी, प्रियंका कुमारी और शांति देवी शामिल हैं। शालिनी का पता श्यामनगर मंडी, ग्रेटर नोएडा और सरोज देवी का पता गांव ऐच्छर दर्ज है। जांच में दीपांशी के भाई का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि वह अल्फा-1 स्थित दूसरे बैंक में कार्यरत है और उसके खाते में भी रकम स्थानांतरित की गई।
मामला उजागर होने के बाद से दीपांशी साकीपुर स्थित अपने घर पर नहीं मिली है। परिजन भी उसके बारे में जानकारी देने से बच रहे हैं। सीबीआई अब बैंकिंग रिकॉर्ड, यूजर आईडी के इस्तेमाल और खातों के बीच हुए लेन-देन की पड़ताल करेगी। साथ ही नामजद लोगों की भूमिका की भी जांच होगी। बैंक की तहरीर में नाम शामिल होना किसी व्यक्ति का अपराध साबित नहीं करता। सभी की जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
बैंककर्मी बहन और भाई के मोबाइल बंद
पीएनबी की शाखा में ग्राहकों की जमा पूंजी में हेराफेरी के मामले में कार्यालय सहायक दीपांशी के साथ उसके भाई की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। पीड़ितों का आरोप है कि दोनों बैंक के अंदर मिलने के बजाय बाहर ही उनसे संपर्क करते थे।
कभी खाता बंद होने तो कभी सर्वर डाउन होने का बहाना बनाकर ग्राहकों को लौटा दिया जाता था। कुछ को बैंक आने पर दीपांशी की नौकरी जाने का डर दिखाया गया। इस दौरान खातों से लाखों की कथित हेराफेरी होती रही।