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मोदी के भाषण ने कराया खास होने का एहसास

Fri, 05 Sep 2014 10:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
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देश के प्रधानमंत्री की बातें शुक्रवार को हर उम्र के विद्यार्थियों को छू गईं। प्रधानमंत्री के संबोधन की हर लाइन पर बजती तालियों की गड़गड़ाहट और विद्यार्थियों के चेहरे की खुशी को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता था।
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शिक्षक दिवस पर विद्यार्थियों को संबोधित करने केप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले ने आम बच्चों को भी खास होने का एहसास कराया। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के निर्देश के बाद ज्यादातर स्कूलों में लाइव प्रसारण के लिए टीवी और रेडियो के इंतजाम किए गए। जबकि कुछ प्राइवेट स्कूलों ने सख्ती के बाद भी प्रसारण से दूरी बनाई।

दोपहर 3 बजे से शुरू होने वाले पीएम के भाषण के लिए छात्र-छात्राओं में सुबह से ही उत्साह बना रहा जो तेज बारिश के बाद भी कम नहीं हुआ। शेड में बैठकर बच्चों ने देश के प्रधानमंत्री का संबोधन सुना।
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स्कूलों में रही 70 से 75 फीसदी उपस्थिति:
एनएच-5 स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, एचएच-5 राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, अजरौंदा के राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ओल्ड फरीदाबाद राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक और केंद्रीय विद्यालय-3 समेत शहर के अन्य स्कूलों में भी शिक्षक दिवस पर आम दिनों की अपेक्षा बच्चों की उपस्थिति अधिक रही। अजरौंदा में 470 विद्यार्थियों में 402 उपस्थित रहे। ओल्ड फरीदाबाद स्थित स्कूल में विद्यार्थियों की उपस्थिति 77 फीसदी रही। जबकि अन्य स्कूलों में 70 से 75 फीसदी विद्यार्थी शिक्षक दिवस पर स्कूल पहुंचे।

मुख्यमंत्री का संबोधन नहीं
पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के तहत स्कूलों में सुबह से ही टीवी और रेडियों की सेटिंग कर दी गई थी। 11.30 पर मुख्यमंत्री का संबोधन नहीं होने पर विद्यार्थियों ने विभिन्न रंगारंग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। करीब तीन घंटे का समय रंगोली, नृत्य, संगीत में हिस्सा लेकर बीता।

निजी स्कूल रहे फिसड्डी
भाषण के प्रसारण के लिए शिक्षा विभाग के निर्देशों के बावजूद अधिकांश निजी स्कूलों ने इससे दूरी बनाए रखी। बच्चों को सुबह से ही स्कूल बुलाया गया और टीचर्स-डे के बाद कई स्कूलों में छुट्टी कर दी गई। जबकि कुछ ने कार्यक्रम का प्रसारण बच्चों को दिखाया।

शाम को स्कूलों में बच्चों को पहुंचाने के नहीं थे कोई इंतजाम:
प्रधानमंत्री का संबोधन सुनने के बाद खाली हुए बच्चों को घर छोड़ने के लिए किसी भी स्कूल में व्यवस्था नहीं की गई थी। नतीजा छुट्टी के बाद बच्चे अपने इंतजाम से घर पहुंचे। जबकि कुछ स्कूलों ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए अभिभावकों को भी स्कूल बुलाया। बारिश को देखते हुए कुछ स्कूलों ने बच्चों को अपने घर पर ही भाषण सुनने के लिए कह दिया था।
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