गोपाल राय ने केंद्र को लिखी थी चिट्टी
जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने वायु प्रदूषण से निपटने की तैयारियों के संबंध में एक बैठक करने की केंद्र से मांग की थी। चिट्ठी में गोपाल राय ने मांग की है कि क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम बारिश) कराने की अनुमति को लेकर बैठक बुलाई जाए। गोपाल राय ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को चिट्ठी लिखी थी। चिट्टी में दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर समय से पहले जरूरी कदम उठाने के लिए कहा था।
क्या है कृत्रिम वर्षा?
दिल्ली में हर साल वायु प्रदूषण फैलता है। जिसकी वजह से लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है। दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कृत्रिम वर्षा यानी आर्टिफिशियल बारिश कराने की योजना बना रही है। दिल्ली में वायु प्रदूषण को बिना बारिश के कम नहीं किया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक, दिल्ली सरकार और आईआईटी कानपुर के बीच राजधानी में कृत्रिम वर्षा कराने को लेकर वार्ता चली थी।
इसे पहले सितंबर 2023 में अरविंद केजरीवाल ने द कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) के साथ बैठक में कहा था कि चीन व दुबई में क्लाउड सीडिंग तकनीक इस्तेमाल की जा रही है, उसी तर्ज पर दिल्ली में खासकर सर्दी के तीन महीने के दौरान इसकी संभावना देखेंगे। इसमें सीआईआई, दिल्ली सरकार का साथ देगी।
देश के नामचीन शिक्षण संस्थानों में शुमार आईआईटी कानपुर ने क्लाउड सीडिंग के जरिए कृत्रिम बारिश की टेक्नॉलजी विकसित की है। संस्थान ने जून 2023 में इसका परीक्षण किया था। दरअसल, कृत्रिम वर्षा वह होती है जो कृत्रिम रूप से 'सूखी बर्फ' (जमे हुए कार्बन डाइऑक्साइड), सिल्वर आयोडाइड या अन्य उपयुक्त कणों के साथ बादलों को मंडराने से उत्पन्न होती है। इसमें कार्बन डाइऑक्साइड, सिल्वर आयोडाइड या अन्य कण संघनन नाभिक के रूप में कार्य करते हैं।
सरल शब्दों में समझें तो विमानों के जरिए बादलों पर खास तरह के रसायनों का छिड़काव किया जाता है, जिसके बाद वह वर्षा होती है। कृत्रिम बारिश कराने के लिए मौसम में विशेष परिस्थिति की जरूरत होती है। जैसे पर्याप्त नमी के साथ बादल और हवा दोनों हो। यह तकनीक ठंड और गर्म बादलों दोनों के लिए अलग-अलग होती है।