पंडित दीनदयाल उपाध्याय पुरातत्व संस्थान में हर साल 15 सीटों पर दाखिला होगा। इसका सत्र अक्तूबर से शुरू होने का अनुमान है। इसके संग्रहालय में गुर्जर संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। यहां का ऑडिटोरियम करीब एक हजार लोगों की क्षमता का है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार से संस्थान का शुभारंभ कर दिया। प्रधानमंत्री 12:35 बजे परिसर में दाखिल हुए। सबसे पहले उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मूर्ति का अनावरण किया। उसके बाद गुर्जर संस्कृति की झलक दिखाने वाले संग्रहालय में गए। वहां सम्राट मिहिरभोज की मूर्ति देखी। वहां से पंडित दीनदयाल उपाध्याय पुरातत्व संस्थान की गैलरी का अवलोकन किया।
इस संग्रहालय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय से जुड़ी तमाम जानकारी संकलित की गई है। वहां से फिर मंच की तरफ बढ़े। उन्होंने कहा कि देश की समृद्धि को प्रदर्शित करने के लिए 25 एकड़ एरिया में संस्थान का निर्माण संस्कृति मंत्रालय की तरफ से कराया गया है। पुरातत्व का मतलब धरती में दबे भारत के गौरवशाली इतिहास को संजोकर रखना है। कार्यक्रम के बाद केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने बताया कि इस संस्थान में हर साले 15 छात्र शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे।
काशी विश्वनाथ के पास मिले 40 और मंदिर
प्रधानमंत्री ने जनसभा में बताया कि वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए संकरे रास्तों पर काम चल रहा है। वहां आसपास के घरों को तोड़ा गया है, जिनके नीचे से मूर्तियां मिलीं है। 200 से 250 साल पुराने 40 मंदिर मिले हैं। अब तक क्या पुरातत्व विभाग सो रहा था। मोदी सरकार भारत माता के जयकारे के लिए काम करती है। पूर्ववर्ती सरकारों ने चाटुकारों को इनाम के तौर पर फार्म हाउस बनाने के लिए मंदिर दे दिए। उन्होंने मीडिया को इसकी जड़ तक जाने की नसीहत दी।
सौभाग्य योजना से 2.5 करोड़ परिवारों के घर रोशन हुए
नया भारत नए रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है। सौभाग्य योजना के तहत 2.5 करोड़ परिवारों के घर रोशन हुए हैं। 2014 से पहले एलईडी बल्ब 350 रुपये का मिलता था। अब 40-50 रुपये में मिल रहा है। इससे करीब 50 हजार करोड़ रुपये की बचत हो रही है। इसमें दलाली खत्म हो गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्रेटर नोएडा की जनसभा में भविष्य में ‘एक विश्व एक सूरज एक ग्रिड’ की परिकल्पना भी जाहिर की। पीएम ने अरनिया (खुर्जा) और बक्सर के पावर प्लांट की आधारशिला रखने के मौके पर कहा कि आज दो बड़े पावर प्लांट का शिलान्यास किया जा रहा है।
खुर्जा में 11 हजार करोड़ रुपये की लागत से पावर प्लांट बन रहा है। इससे 1320 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। इस प्लांट से उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान व हिमाचल प्रदेश को भी फायदा मिलेगा। इसकी जमीन व अन्य कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस प्लांट से उत्पादित 60 प्रतिशत बिजली इसी क्षेत्र को मिलेगी।
बाकी 40 फीसदी बिजली अन्य स्थानों को दी जाएगी। वहीं, बक्सर के प्लांट से बिहार के अलावा पूर्वी भारत को बिजली मिल सकेगी। इसे बनाने में करीब 10439 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। पहले की सरकारों में देश में पावर सेक्टर को नजरअंदाज किया। इसका उदाहरण शुक्रवार को कानपुर में दिखा।
वहां के पनकी पावर प्लांट में 40 से 50 साल पुरानी मशीनें लगी थीं। उन्होंने इसकी तुलना जर्जर होती कांग्रेस की तरह कहकर चुटकी भी ली। इससे 10 रुपये प्रति यूनिट बिजली का उत्पादन किया जा रहा था, जबकि नई तकनीकों से दो रुपये प्रति यूनिट बिजली उत्पादन हो रहा है। अब वहां दोबारा से यूनिट बन रही है।
पांच साल में एक लाख मेगावाट बिजली का अतिरिक्त उत्पादन
2014 में हमारी सरकार बनने के बाद पावर सेक्टर में चार चीजों पर काम हुए, प्रोडक्शन, ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन और करेक्शन। 2014 में सरकार बनने के बाद सौर ऊर्जा, कोयला, पानी और न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट पर काम हुए। सरकार का लक्ष्य 2022 तक 175 गीगावाट पावर उत्पादन का लक्ष्य है। पहले ग्रिड फेल होने या एक-दो दिन का कोयला बचे होने की खबरें मीडिया की सुर्खियां बनतीं थीं। मैं छोटे सपने नहीं देखता और न ही छोटे काम करता हूं। 1950 से लेकर 2014 तक 65 वर्षों में 2.5 लाख मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ, जबकि 2014 से अब तक एक लाख मेगावाट बिजली का अतिरिक्त उत्पादन होने लगा है।