दिल्ली हाईकोर्ट ने मौलाना साद मामले में डाली गई एक याचिका की सुनवाई को 28 मई तक के लिए टाल दिया है। इस याचिका में मांग की गई थी कि समय के अनुसार तब्लीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद के केस को एनआईए को सौंप दिया जाए।
हालांकि अदालत में दिल्ली पुलिस ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा है कि वह मामले की जांच कर रहे हैं और जांच सही दिशा में जा रही है। ऐसे में इस मामले को एनआईए को नहीं सौंपा जाना चाहिए। अदालत ने दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद इस केस की सुनवाई को 28 मई तक के लिए टाल दिया गया है।
क्या है याचिका
मौलाना साद पर सरकार के आदेशों का उल्लंघन करत हुए बड़ी सभा आयोजित करने का आरोप है। याचिका की सुनवाई 13 मई को दिल्ली हाईकोर्ट में होनी थी। दिल्ली पुलिस काफी समय बीतने के बावजूद साद को गिरफ्तार करने में विफल रही है।
मुंबई के वकील घनश्याम उपाध्याय द्वारा दायर की गई याचिका में केंद्र, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस आयुक्त को अपराध शाखा से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को जांच सौंपने के लिए निर्देश देने की मांग की है। जो समयबद्ध तरीके से मामले की जांच करे और जांच की निगरानी उच्च न्यायालय द्वारा की जाए।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 31 मार्च को निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन एसएचओ की शिकायत पर सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें बड़ी सभाओं के खिलाफ आदेशों के उल्लंघन में तब्लीगी जमात अनुयायियों की भूमिका पाई गई थी।
बता दें कि दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में बड़ी संख्या में तब्लीगी जमात से जुड़े लोग कोरोना संक्रमित पाए गए थे। लॉकडाउन और धारा 144 लागू होने के बावजूद मरकज में जमात से जुड़े सैकड़ों लोग शामिल हुए थे। इस घटना के बाद से ही मौलाना साद फरार है। पुलिस के बार-बार नोटिस के बावजूद वह अब तक सामने नहीं आया है।
मौलाना साद के सास ससुर समेत 81 लोगों की रिपोर्ट आई निगेटिव
नोएडा लैब से शनिवार को 81 लोगों की रिपोर्ट जारी की गई थी और सभी निगेटिव आई। खास बात यह है कि इनमें मौलाना साद के सास-ससुर सहित ससुराल के चार लोग शामिल थे।
मौलाना साद की ससुराल से जुड़े लोगों के सैंपल 14 अप्रैल को नोएडा लैब भेजे गए थे। ऐसे में विभाग ने तीन दिन पहले मौलाना साद के ससुराल के सात लोगों के सैंपल पुन: भेजे थे। इनमें से चार लोगों की जांच रिपोर्ट शनिवार को 81 लोगों के साथ जारी की गई।