दक्षिण भारत की आध्यात्मिक नेता माता अमृतानंदमयी पर लिखी पुस्तक पर रोक लगाने के लिए उनके एक भक्त ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
याचिका में उन्होंने पुस्तक में काफी आपत्तिजनक सामग्री होने का आरोप लगाया है। न्यायमूर्ति मनमोहन ने याचिका पर सुनवाई 28 मई तय की है।
अदालत ने याची से कहा कि अदालत का काम किसी पुस्तक पर रोक लगाना नहीं है और यह काम सरकार का है।
आप सरकार के पास क्यों नहीं जाते। अदालत ने याची को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि वे ऐसा फैसला पेश करे, जिससे यह साबित हो कि अदालत पुस्तक पर रोक लगा सकती है।
यह याचिका मुरलीधरन सी ने दायर की है। याची ने आरोप लगाया कि माता अमृतानंदमयी के पूर्व निजी सचिव ने उक्त पुस्तक लिखी है जिसमें आश्रम में यौन शोषण इत्यादि आरोप लगाकर मानहानि व अपमान किया गया है।
इस पुस्तक से मां के अनुयायियों व भक्तों को काफी आघात लगा है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि केंद्र सरकार को भारत में पुस्तक के वितरण व इंटरनेट पर भी पुस्तक के अंश हटाने का निर्देश दिए जाएं।