तीन-तीन लेन वाले प्रमुख मार्गों का होगा व्यवहार्यता अध्ययन, सड़क सुरक्षा से समझौता नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी में ट्रैफिक जाम कम करने और सफर को तेज बनाने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस सिग्नल-फ्री कॉरिडोर योजना का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रही है। फिलहाल सात प्रमुख कॉरिडोरों पर काम चल रहा है, जबकि अब 25 नए मार्गों का व्यवहार्यता अध्ययन (फिजिबिलिटी स्टडी) कराया जाएगा। जिन मार्गों पर यह मॉडल सुरक्षित और व्यावहारिक पाया जाएगा, वहां चरणबद्ध तरीके से इसे लागू किया जाएगा।
यह पहल गुरु हनुमान सोसाइटी ऑफ इंडिया के प्रस्ताव के बाद आगे बढ़ी है। संस्था ने यू-टर्न आधारित ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली अपनाने का सुझाव दिया है। इसके तहत ट्रैफिक सिग्नलों पर रुकने की आवश्यकता कम होगी, जिससे यात्रा का समय घटेगा, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में कमी आएगी।
संयुक्त पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) संजय त्यागी ने कहा कि विभाग मौजूदा सड़क ढांचे के भीतर व्यावहारिक इंजीनियरिंग उपायों से यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने पर काम कर रहा है। जहां संभव होगा, वहां सिग्नल-फ्री कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, लेकिन सड़क सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
प्रस्तावित कॉरिडोरों में द्वारका के प्रमुख चौराहे, उत्तम नगर-द्वारका मोड़, राजौरी गार्डन फ्लाईओवर से मोती नगर तक नजफगढ़ रोड, पंजाबी बाग से टिकरी-बहादुरगढ़ सीमा तक रोहतक रोड, लाल किला सर्किट, पटेल रोड, महाराजा नाहर सिंह मार्ग, महरौली-गुरुग्राम रोड, मथुरा रोड, आउटर रिंग रोड, रिंग रोड के कई हिस्से, यूईआर-1 और यूईआर-2, कालिंदी कुंज, पंखा रोड, महरौली-बदरपुर रोड, एयरपोर्ट-पालम, मॉडल टाउन, आईआईटी क्षेत्र और पटपड़गंज स्थित मैक्स अस्पताल के आसपास के मार्ग शामिल हैं। वर्तमान में राजघाट क्षेत्र और राजौरी गार्डन फ्लाईओवर से विशाल सिनेमा तक नजफगढ़ रोड पर सिग्नल-फ्री व्यवस्था विकसित की जा रही है।