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Delhi NCR News: एफओबी का गड्ढा खुदा, अब अंडरपास की फाइल चली

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अब अंडरपास की व्यवहार्यता जांचेगी सरकार, हाईकोर्ट ने मांगा स्थायी समाधान
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली कैंट में राजपूताना राइफल्स के जवानों और प्रशिक्षुओं के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग का मामला एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंच गया है। रिंग रोड के दूसरी तरफ स्थित प्रशिक्षण एवं परेड मैदान तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल होने वाले रास्ते के स्थायी समाधान के तौर पर अब फुट ओवरब्रिज (एफओबी) के बजाय अंडरपास की संभावना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, अंडरपास बनाने का फैसला अभी नहीं हुआ है।
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि रेलवे और दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की बैठक हो चुकी है और अब संयुक्त निरीक्षण कर अंडरपास की व्यवहार्यता जांची जाएगी। दिल्ली कैंट में राजपूताना राइफल्स के जवानों को प्रतिदिन प्रशिक्षण और परेड के लिए रिंग रोड पार कर जाना पड़ता है। जवान एक संकरे और गंदे बरसाती नाले की कल्वर्ट से होकर रिंग रोड पार करते हैं। बारिश के दौरान पानी भरने पर यह रास्ता मुश्किल हो जाता है और उन्हें करीब 2.5 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को सुरक्षित और स्थायी रास्ता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
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पहले एफओबी पर बनी थी सहमति
हाईकोर्ट की निगरानी में 2025 में पीडब्ल्यूडी, दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड, सेना, रेलवे समेत संबंधित एजेंसियों की बैठकें हुई थीं। स्थायी एफओबी के निर्माण के लिए करीब 10 महीने की अवधि पर सहमति बनी थी। मार्च 2026 में स्थायी एफओबी के लिए मौके पर खुदाई और नींव का काम शुरू हुआ। उस समय अधिकारियों ने इसके करीब छह महीने में पूरा होने की उम्मीद जताई थी लेकिन छह महीने से अधिक समय बाद भी परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी है।
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अंडरपास की व्यवहार्यता पर उठे सवाल
अब अंडरपास की संभावना सामने आने के बाद बारिश में जलभराव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पीआईएल दाखिल करने वाले अधिवक्ता आदित्य तंवर ने आशंका जताई है कि अंडरपास में भी मौजूदा कल्वर्ट जैसी जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है।

संयुक्त निरीक्षण के बाद ही तय होगा अंडरपास
अब संयुक्त निरीक्षण में यह देखा जाएगा कि अंडरपास तकनीकी रूप से संभव है या नहीं। इसके बाद रिपोर्ट हाईकोर्ट में रखी जाएगी।
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