याचिका में कहा गया था कि यदि राज्य अपनी धार्मिक विधि और पवित्रता को बनाए रखने के लिए भारत में उड़ानों में व्यक्ति पर कृपाण ले जाने की मांग को स्वीकार कर लेता है, तो उन देशों में ऐसी निर्देशात्मक पवित्रता का क्या होता है जहां विमानन नीति द्वारा इसके साथ परिवहन पर प्रतिबंध है? यदि कृपाण को केवल चेक इन बैगेज में ही पैक करके ले जाया जाए तो क्या आस्था अपवित्र हो जाती है? इसके अलावा याचिका में अन्य यात्रियों की सुरक्षा का भी मुद्दा उठाया गया था।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू सेना द्वारा इसी तरह की एक अन्य जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें सिख यात्रियों को घरेलू उड़ानों में कृपाण ले जाने की अनुमति दी गई थी।